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श्रीदेवी पुण्यतिथि: 'मॉम' वो आखिरी फिल्म जो हर 'माँ' के लिए बनी है एक मिसाल, दिला गई नेशनल अवार्ड

By ऐश्वर्य अवस्थी | Updated: February 24, 2019 12:45 IST

24 फरवरी 2018 को श्रीदेवी ने देश से दूर इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

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ठळक मुद्देश्रीदेवी ने अपने करियर में एक से एक नायाब फिल्में कींमॉम उनकी आखिरी और कभी ना भूलने वाली फिल्म है

अपने फैंस को सदमा देकर 54 साल की उम्र में अभिनेत्री श्रीदेवी ने दुबई में आखिरी सांस ली तो हर किसी आंखे नम हो गईं। 24 फरवरी 2018 को श्री ने देश से दूर इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। यूं अचानक दुनिया को छो़डकर चले जाने वाली श्रीदेवी की कमी बॉलीवुड में शायद ही कोई भर पाए। लम्हें, चांदनी जैसी अनगिनत फिल्मों में शानदार अभिनय को पेश करने वाली इस अभिनेत्री को अब फैंस फिर कभी पर्दे पर नहीं देख पाएंगे। लेकिन श्री की बतौर लीड रोल में आखिर फिल्म मॉम थी।

आखिरी फिल्म जो कर गई घर

शादी के बाद फिल्मों से दूर रहने वाली श्री ने साल 2012 में फिल्म इंग्लिश विंग्लिश से एक बार फिर शानदार तरीके से लंबे समय के बाद बड़े पर्दे पर वापसी की थी। फिल्म को अपार सफलता मिली इसके बाद 2017 में आई उनकी फिल्म मॉम हर किसी के दिल में घर कर गई। मां की बेटी के लिए अनोखे प्यार की कहानी पेश करती ये फिल्म पर्दे पर धूम मचा गई। पर्दे पर श्रीदेवी की ये आखिरी फिल्म थी जिससे फैंस रुबरु हुए थे। 

7 जुलाई 2017 को आई मॉम श्रीदेवी की बतौर लीड रोल की आखिरी फिल्म बन गई। जब फिल्म पर्दे पर धमाल मचा रही थी तो उस समय किसी को भी नहीं पता था कि ये उनकी आखिरी फिल्म होने वाली है जिसमें वह लीड रोल के जरिए फैंस को मनोरंजित कर रही हैं। अब इस फिल्म के साथ ही फिल्मी इतिहास में श्रीदेवी के नाम पर ये फिल्म दर्ज हो गई है।

मां की अनोखी छाप

मॉम में वह पहली बार एक दमदार मां के किरदार में नजर आईं थीं और फैंस के बीच ऐसी छाप छोड़ गईं जिसको कोई नहीं भूल पाएगा। इस फिल्म में दिखाया गया था कि किस तरह से एक बेटी के दर्द के हक के लिए एक मां किस हद तक जा सकती है, और उस मां के रोल में नजर आईं थीं श्रीदेवी। फिल्म में उनके काम को जमकर सराहा गया था। एक वो हिम्मतवाली मां जो शातिर तरीके से अपनी बेटी के रेपिस्टों को खुद सजा देती है।  श्रीदेवी ने मां का एक ऐसा रोल किया था कि हर एक मां की आंखों में आंसू आ गए थे। फिल्म में उन्होंने ऐसे अभिनय किया जैसे वह असल में एक मां के दर्द को महसूस करके उसे पर्दे पर पेश कर रही हों। ये फिल्म हर के मां के लिए मिसाल बन गई। श्रीदेवी ने जाते जाते इस फिल्म से हर मां को एक मैसेज दिया, जब बात अपनी बेटी की हो तो हर हद पार कर जाती है एक मां।

मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

खास बात ये थी इस फिल्म के लिए श्री को पहली बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। लेकिन दुख की बात ये कि इसको लेने के लिए वह इस दुनिया में नहीं थीं। इस फिल्म के लिए 2018 में उनको मरणोंपरांत राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया था।

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