गौरतलब है कि गत जुलाई में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तिब्बत यात्रा के बाद से वहां चीन की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं. वहां उसकी सैन्य मौजूदगी और निर्माण कार्यो में तेजी आई है.
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आर्थिक विकास के लिए सहज और भरोसेमंद ऊर्जा की आपूर्ति अत्यावश्यक होती है, जबकि नई आपूर्ति का खर्च तो बेहद डांवाडोल है. दूसरी तरफ हमारे सामने सन 2070 तक शून्य कार्बन की चुनौती भी है.
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Omicron scare: जयपुर के एक निजी स्कूल में 12 बच्चे, पंजाब के दो अलग-अलग स्कूलों में 27 से ज्यादा बच्चे, तेलंगाना के एक शिक्षण संस्थान में 30 से ज्यादा छात्न व शिक्षक संक्रमित पाए गए हैं.
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विश्व व्यापार से हमें दूसरे देशों में बना सस्ता माल उपलब्ध हो जाता है लेकिन इससे आर्थिक विकास हो, यह जरूरी नहीं है. ऐसा समझे कि चीन के शंघाई में किसी बड़ी फैक्ट्री में सस्ती फुटबाल का उत्पादन होता है.
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एनीमिया के दुष्परिणाम बहुत ज्यादा हैं. इससे शरीर में ऊर्जा की कमी होती है, उत्पादकता प्रभावित होती है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि रक्ताल्पता वाली महिलाओं से पैदा होने वाले बच्चे कुपोषित होते हैं. इसलिए कुपोषणमुक्त भारत का सपना तब तक साकार नहीं हो सक
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वर्तमान स्थिति में यदि ऐसा हुआ तो क्या इसका दोष विपक्ष के माथे नहीं आएगा? विपक्षी सदस्यों ने पिछले सत्र में जो हंगामा राज्यसभा में मचाया था, वह काफी शर्मिदगी पैदा करनेवाला था।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि ओमीक्रॉन बीटा और डेल्टा रूपों से आनुवंशिक रूप से भिन्न है. लेकिन फिलहाल ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि आनुवंशिक परिवर्तन इसे ज्यादा खतरनाक बनाते हैं या नहीं.
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कानूनों की वापसी करने का निर्णय लेने में सरकार को पूरा एक साल लग गया, और मिनटों में कानूनों को निरस्त कर दिया गया. कोई बहस नहीं, कोई विचार-विमर्श नहीं. संसद को इस बारे में सरकार से सवाल-जवाब का अवसर मिलना ही चाहिए था.
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यदि इन कानूनों के जाते और आते वक्त जमकर बहस होती तो किसानों को ही नहीं, देश के आम लोगों को भी पता चलता कि भाजपा सरकार खेती के क्षेत्र में अपूर्व क्रांति लाना चाहती है।
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किसानों के लिए बनाए गए कानूनों के बारे में अभी तक केंद्र सरकार ने खुलकर यह नहीं माना है कि उससे गलती हुई थी. प्रधानमंत्री की ओर से यही कहा गया है कि उनकी तपस्या में कहीं कोई कमी रह गई है.
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