लाइव न्यूज़ :

वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉगः पेगासस जासूसी मामले में सरकार की किरकिरी

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: October 28, 2021 13:55 IST

इस मामले ने जब तूल पकड़ा, तब मैंने सुझाव दिया था कि सरकार थोड़ी हिम्मत करती तो यह मामला आसानी से सुलझ सकता था। सरकार उन निदरेष नेताओं, पत्नकारों और अन्य व्यक्तियों से माफी मांग लेती, जो निर्दोष थे

Open in App

सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले दो साल से चल रहे जासूसी के पेगासस नामक मामले में सरकार के सारे तर्को, बहानों और टालमटोलों को रद्द कर दिया है। उसने कई व्यक्तियों, संगठनों और प्रमुख पत्नकारों की याचिका स्वीकार करते हुए जासूसी के इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। यह जांच अब सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर।वी। रवींद्रन की अध्यक्षता में होगी और उसकी रपट वे अगले दो माह में अदालत के सामने पेश करेंगे।

जब से यह खबर प्रकट हुई कि मोदी सरकार ने इजराइल से जासूसी का पेगासस नामक उपकरण खरीदा है और वह भारत के सैकड़ों नेताओं, पत्नकारों, उद्योगपतियों, अफसरों आदि के कम्प्यूटरों और फोन पर उस उपकरण से अपनी नजर रखता है, एक हंगामा-सा खड़ा हो गया। जब यह मामला अदालत में आया तो सरकार ऐसी दिखी, जैसे कि चिलमन से लगी बैठी है। न साफ छुपती है और न ही सामने आती है। 500 करोड़ रु। के इस कीमती उपकरण का इस्तेमाल सरकार कहती है कि वह आतंकवादियों, तस्करों, ठगों और अपराधियों को पकड़ने के लिए करती है। यदि ऐसा है तो यह स्वाभाविक है। इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन फिर सरकार उन नामों को अदालत से भी क्यों छिपा रही है?

सरकार कहती है कि ऐसा वह राष्ट्रहित में कर रही है। लेकिन क्या यह काम लोकतंत्न-विरोधी नहीं है? अपने विरोधियों, यहां तक कि अपनी पार्टी के नेताओं और अपने ही अफसरों के विरु द्ध आप जासूसी कर रहे हैं और आप अदालत से यह तथ्य भी छिपा रहे हैं कि आप उस इजराइली जासूसी यंत्न-तंत्न का इस्तेमाल कर रहे या नहीं? अदालत ने सरकारी रवैये की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर उसे कुछ भी ऊटपटांग काम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उसने सरकार के इस सुझाव को भी रद्द कर दिया है कि इस मामले की जांच विशेषज्ञों के एक दल से करवाई जाए। विशेषज्ञों को तो कोई भी सरकार प्रभावित कर सकती है। इसीलिए अब एक न्यायाधीश ही इस मामले की जांच करेंगे। यह मामला सिर्फ नेताओं और पत्नकारों की जासूसी का ही नहीं है, यह प्रत्येक नागरिक के मानवीय अधिकारों की सुरक्षा का है। सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला न्यायपालिका की इज्जत में तो चार चांद लगा ही रहा है, सरकार की मुश्किलें भी बढ़ा रहा है।

इस मामले ने जब तूल पकड़ा, तब मैंने सुझाव दिया था कि सरकार थोड़ी हिम्मत करती तो यह मामला आसानी से सुलझ सकता था। सरकार उन निदरेष नेताओं, पत्नकारों और अन्य व्यक्तियों से माफी मांग लेती, जो निर्दोष थे और अब ऐसा इंतजाम कर सकती थी कि कोई भी सरकार वैसी गलती न कर सके।

टॅग्स :Pegasusमोदी सरकारmodi government
Open in App

संबंधित खबरें

भारतImport Duty Cut: सरकार ने आज से 41 वस्तुओं पर हटाया आयात शुल्क, चेक करें पूरी लिस्ट

भारतऊर्जा संकट में भी आत्मविश्वास कायम रहने का क्या है राज ?

भारतBihar News: राज्य अधिकारियों ने दिया अपनी संपत्ति का ब्योरा, जानें सबसे ज्यादा अमीर कौन?

कारोबारNew Labour Code: नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर, 1 अप्रैल से लागू हुए नए नियम, ओवरटाइम और PF में हुए ये बदलाव

भारतकैसे जानें आपके घर तक पहुंचेगी PNG या नहीं? उपलब्धता और रजिस्ट्रेशन की पूरी जानकारी यहां

भारत अधिक खबरें

भारतदिल्ली और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में महसूस हुए भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में आया भूकंप

भारतकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्रीनविच मीन टाईम को महाकाल स्टेंडर्ड टाईम में बदलने पर दिया जोर

भारतदलित समुदाय के 22 फीसदी वोट पर जमीन अखिलेश की निगाह , 14 अप्रैल पर अंबेडकर जयंती पर गांव-गांव में करेगी कार्यक्रम

भारतराघव चड्ढा पर आतिशी का बड़ा आरोप, 'BJP से डरते हैं, अगला कदम क्या होगा?'

भारतउत्तर प्रदेश उपचुनाव 2026ः घोसी, फरीदपुर और दुद्धी विधानसभा सीट पर पड़ेंगे वोट?, 2027 विस चुनाव से पहले सेमीफाइनल, सीएम योगी-अखिलेश यादव में टक्कर?