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वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग: सावरकर के नाम पर आक्षेप ठीक नहीं

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: October 14, 2021 11:26 IST

कई वामपंथी और कांग्रेसी मानते हैं कि सावरकर माफी मांगकर अंडमान-निकोबार की जेल से छूटे थे, उन्होंने हिंदुत्व की संकीर्ण सांप्रदायिकता फैलाई थी और उन्होंने ही गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को आशीर्वाद दिया था.

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ठळक मुद्देकई वामपंथी और कांग्रेसी मानते हैं कि सावरकर माफी मांगकर अंडमान-निकोबार की जेल से छूटे थे.गांधीजी सावरकर से लंदन के इंडिया हाउस में 1909 में मिले.दोनों में अहिंसा और उस समय की मुस्लिम सांप्रदायिकता को लेकर गहरा मतभेद था.

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर पर एक पुस्तक का विमोचन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सावरकर पर किए जाने वाले आक्षेपों का कड़ा प्रतिवाद किया है. 

उन्होंने सावरकर को बेजोड़ राष्ट्रभक्त और विलक्षण स्वातंत्र्य-सेनानी बताया है लेकिन कई वामपंथी और कांग्रेसी मानते हैं कि सावरकर माफी मांगकर अंडमान-निकोबार की जेल से छूटे थे, उन्होंने हिंदुत्व की संकीर्ण सांप्रदायिकता फैलाई थी और उन्होंने ही गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को आशीर्वाद दिया था.

गांधी-हत्याकांड में सावरकर को भी फंसा लिया गया था लेकिन उन्हें ससम्मान बरी करते हुए जस्टिस खोसला ने कहा था कि इतने बड़े आदमी को फिजूल ही इतना सताया गया. 

स्वयं गांधीजी सावरकर से लंदन के इंडिया हाउस में 1909 में मिले और 1927 में वे उनसे मिलने रत्नागिरि में उनके घर भी गए. दोनों में अहिंसा और उस समय की मुस्लिम सांप्रदायिकता को लेकर गहरा मतभेद था. 

सावरकर मुसलमानों के नहीं, मुस्लिम लीगियों के विरोधी थे. हिंदू महासभा के अपने अध्यक्षीय भाषणों में उन्होंने सदा हिंदुओं और मुसलमानों के समान अधिकार की बात कही. 

अपने ग्रंथ 1857 का स्वातंत्र्य-समर में उन्होंने बहादुरशाह जफर, अवध की बेगमों तथा कई मुस्लिम फौजी अफसरों की बहादुरी का मार्मिक वर्णन किया है. 

यह ठीक है कि सावरकर का हिंदुत्व ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा का आधार बना लेकिन सावरकर का हिंदुत्व संकीर्ण नहीं था. 

जहां तक सावरकर द्वारा ब्रिटिश सरकार से माफी मांगने की बात है, इस मुद्दे पर मैंने कई वर्षो पहले राष्ट्रीय संग्रहालय के गोपनीय दस्तावेज खंगाले थे और अंग्रेजी में लेख भी लिखे थे. 

उन दस्तावेजों से पता चलता है कि सावरकर और उनके चार साथियों ने ब्रिटिश वायसराय को अपनी रिहाई के लिए जो पत्र भेजा था, उस पर गवर्नर जनरल के विशेष अफसर रेजिनाल्ड क्रेडोक ने लिखा था कि सावरकर झूठा अफसोस जाहिर कर रहा है. वह जेल से छूटकर यूरोप के आतंकवादियों से जाकर हाथ मिलाएगा और सरकार को उलटाने की कोशिश करेगा. सावरकर की इस सच्चाई को छिपाकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कई बार की गई. 

अंडमान-निकोबार जेल से उनकी नामपट्टी भी हटाई गई लेकिन मैं तो उस कोठरी को देखकर रोमांचित हो उठा, जिसमें सावरकर ने बरसों काटे थे और जिसकी दीवारों पर गोदकर सावरकर ने कविताएं लिखी थीं.

टॅग्स :Veer SavarkarआरएसएसRSSमोहन भागवतराजनाथ सिंहRajnath Singh
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