लाइव न्यूज़ :

निशान्त का ब्लॉगः 93 फीसदी भारतीय ले रहे जहरीली हवा में सांस

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: March 5, 2022 14:36 IST

रिपोर्ट से पता चला कि दुनिया की बहुत बड़ी आबादी उन क्षेत्रों में रहती है जहां पीएम 2.5 का स्तर डब्ल्यूएचओ की सिफारिशों से अधिक है, जो कि औसत वार्षिक पीएम 2.5 एक्सपोजर स्तर 5 मिलीग्राम/घन मीटर है।

Open in App

एक ताजा जारी वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, 93 प्रतिशत भारतीय ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां वायु प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ के मानकों से अधिक है। इस रिपोर्ट से पता चला है कि इसके परिणामस्वरूप भारत में जीवन प्रत्याशा लगभग 1.5 वर्ष कम हो गई है। इस तथ्य का खुलासा अमेरिका के  हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट द्वारा जारी वार्षिक स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर नाम की रिपोर्ट में हुआ। अध्ययन से पता चला है कि 2019 में   भारत में पीएम 2.5 को 979700 मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

रिपोर्ट से पता चला कि दुनिया की बहुत बड़ी आबादी उन क्षेत्रों में रहती है जहां पीएम 2.5 का स्तर डब्ल्यूएचओ की सिफारिशों से अधिक है, जो कि औसत वार्षिक पीएम 2.5 एक्सपोजर स्तर 5 मिलीग्राम/घन मीटर है। औसतन, दुनिया की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी उन क्षेत्नों में रहती है जहां ओजोन का स्तर 2019 में डब्ल्यूएचओ के सबसे कम कड़े अंतरिम लक्ष्य से अधिक था।

कांगो, इथियोपिया, जर्मनी, बांग्लादेश, नाइजीरिया, पाकिस्तान, ईरान और तुर्की जैसे देशों के बाद, विश्व स्तर पर भारत नौवें स्थान पर है, जो ओजोन (98 प्रतिशत) के संपर्क में है और चीन 10 वें स्थान पर है। लेखकों ने अध्ययन में लिखा, ‘वायु प्रदूषण दुनिया भर में मौतों और विकलांगता के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है; अकेले 2019 में, वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से 6.7 मिलियन मौतें हुईं।’  

पीएम 2.5 के बड़े जोखिम ने देशों और क्षेत्रों के लिए जीवन प्रत्याशा को भी कम कर दिया है। यह मिस्र में 2.11 वर्ष, सऊदी अरब में 1.91 वर्ष, भारत में 1.51 वर्ष, चीन में 1.32 वर्ष और पाकिस्तान में 1.31 वर्ष कम हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषण में शामिल 204 देशों में से केवल 25 देशों ने सबसे कड़े लक्ष्य को पूरा किया है। 49 देशों ने 35 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के न्यूनतम कड़े डब्ल्यूएचओ अंतरिम लक्ष्य को भी पूरा नहीं किया। ये ज्यादातर उप-सहारा अफ्रीका (25), उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व (17), और दक्षिण एशिया (7) के देश थे। इसका मतलब है कि दुनिया की आधी से अधिक आबादी उन क्षेत्नों में रहती है जहां 2019 में पीएम 2.5 का स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक है, जबकि उच्च आय वाले देशों में, एक प्रतिशत से भी कम आबादी इससे ऊपर के स्तर के संपर्क में है। 

टॅग्स :वायु प्रदूषणAir Quality Management Commissionदिल्लीWHO
Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्टजहांगीर पुरी में 17 वर्षीय हसमत की चाकू मारकर हत्या, शरीर पर कई वार, मृतक के भाई हकीम ने कहा- इरफान, इमरान और रिजबुल ने मार डाला?

क्राइम अलर्टमैडम दुकान के सामने गाड़ी मत लगाओ, ग्राहक को आने में दिक्कत होगी?, 78 वर्षीय दुकानदार को महिला उपनिरीक्षक ने थप्पड़ मारा, प्राथमिकी दर्ज

भारतगोदामों से सीधे एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध, सीएम रेखा गुप्ता ने कहा-भंडारण केंद्रों पर न जाएं और न ही भीड़ में इकट्ठा हों

भारतघायल हूं इसलिए घातक हूं?, राघव ने एक्स पर किया पोस्ट, मैं बोलना नहीं चाहता था, मगर चुप रहता तो बार-बार दोहराया गया झूठ भी सच लगने लगता, वीडियो

भारतLPG Cylinder Update: सिलेंडर के लिए अब लंबी वेटिंग खत्म! दिल्ली में बस ID कार्ड दिखाओ और 5KG सिलेंडर पाओ

भारत अधिक खबरें

भारत'मेरे पति 40 साल के हैं, मैं 19 की': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में महिला ने अपने प्रेमी के साथ रहने का अधिकार जीता

भारत'IIT बाबा' अभय सिंह ने कर्नाटक की इंजीनियर से शादी की, पत्नी के साथ हरियाणा में अपने पैतृक गांव पहुंचे

भारतSamrat Vikramaditya Mahanatya: 60 हजार से ज्यादा दर्शकों ने देखा 'सम्राट विक्रमादित्य', वाराणसी के रोम-रोम में बसा अनोखा मंचन, देखें Photos

भारतDelhi Assembly Security Breach: कार में सवार व्यक्ति ने कॉम्प्लेक्स का गेट तोड़कर पोर्च में रखा गुलदस्ता, वीडियो

भारतबिहार में शराबबंदी कानून को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उठाया सवाल, कहा- बिहार में 40 हजार करोड़ रुपये की एक समानांतर अवैध अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है