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ब्लॉगः दुनिया को आज दयालुता की सर्वाधिक जरुरत

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: November 13, 2021 15:45 IST

‘ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स-2018’ के अनुसार दुनिया के 63 से अधिक देशों में कोई न कोई आतंकी वारदात होती ही रहती है। इराक दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में गिना जाता है।

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धर्म उसी मनुष्य में वास करता है, जिसके दिल में दया होती है। एक दयावान व्यक्ति कभी किसी का अहित नहीं कर सकता। विश्व दयालुता दिवस सकारात्मकता और दया के सूत्र पर आधारित है।

विश्व दयालुता दिवस की शुरुआत 1998 में वर्ल्ड काइंडनेस मूवमेंट संगठन द्वारा की गई थी, जिसकी स्थापना 1997 के टोकियो सम्मेलन में दुनिया भर के दयालु संगठनों द्वारा की गई थी। 2019 में इस संगठन को स्विस कानून के तहत एक आधिकारिक एनजीओ के रूप में पंजीकृत किया गया था। वर्तमान में वर्ल्ड काइंडनेस मूवमेंट में 28 से अधिक राष्ट्र शामिल हैं जिनका किसी भी धर्म या राजनीतिक मूवमेंट से संबंध नहीं है।

अपने लिए, दूसरों के लिए और सभी के प्रति दयावान बनिए क्योंकि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण दया का गुण है जो हर एक इंसान के अंदर होता है। एक संस्कारी व्यक्ति हमेशा परपीड़ा में सहानुभूति का प्रदर्शन करता है। जब किसी को आवश्यकता हो तो उसकी मदद करता है। दयालुता के लिए जीवन में साधन-संपन्न होने की आवश्यकता नहीं है। अपने हृदय को उदार बनाकर इसे जीवन में अपनाया जा सकता है।

कोरोना जैसी खतरनाक महामारी के दौरान लोग अपने घरों से बाहर निकलने में डरते थे, तब ऐसी स्थिति में कुछ दयावान लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना पशु-पक्षियों के साथ-साथ इंसानों की भी चिकित्सा सेवा, अन्न दान, परप्रांतीय मजदूरों को खाना एवं उनके गांव जाने के लिए परिवहन की भी व्यवस्था की। कई लोगों को नौकरी से निकाला गया, उन्हें आर्थिक मदद भी की गई। लॉकडाउन के काल में कई व्यवसायियों का व्यवसाय ठप हो गया था, उनकी भी मदद की गई। इस संकट की घड़ी में बहुत सी समाजसेवी संस्थाएं तथा व्यक्तिगत तौर पर भी मदद के लिए लोग आगे आए। यह इंसानियत का एक अच्छा उदाहरण है।

‘ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स-2018’ के अनुसार दुनिया के 63 से अधिक देशों में कोई न कोई आतंकी वारदात होती ही रहती है। इराक दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में गिना जाता है। वहीं अफगानिस्तान में हर दूसरे दिन हमले होते हैं। दुनिया से आतंकवाद मिटाने के लिए कई देश इकट्ठा होकर इसका हल खोज रहे हैं। विभिन्न देशों के धर्मगुरुओं के माध्यम से भी वहां आतंकवाद मिटाकर शांति लाने का प्रयास निरंतर हो रहा है। आतंकवाद से बचने के उपाय के तौर पर दया, शांति, मानवता का संदेश फैलाना है। गरीब के ऊपर दया करिए, शोषित-पीड़ित के ऊपर दया करिए। भूखे को खाना खिलाइए, प्यासे को पानी पिलाइए, गरीब बच्चों को नि:शुल्क ट्यूशन पढ़ाइए, पक्षियों के लिए छत पर पानी रखें, धरती के समस्त जीव-जंतु पर दया करें। दयावान बनिए और जरूरतमंदों की मदद कीजिए। यही विश्व दयालुता दिवस का संदेश है।

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