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कोविड-19 के बीच अभूतपूर्व रियायतें, जयंतीलाल भंडारी का ब्लॉग

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: February 2, 2021 13:28 IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 के लिये कुल 34,83,236 करोड़ रुपये के व्यय का बजट पेश किया है. यह चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान 34,50,305 करोड़ रुपये से थोड़ा ही अधिक है.

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ठळक मुद्देरोजगार के नए अवसर पैदा करने के प्रयास किए गए हैं. तेजी से घटे हुए निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए आकर्षक प्रावधान किए गए हैं.बैंकों में लगातार बढ़ते हुए एनपीए को नियंत्रित करने और क्रेडिट सपोर्ट को जारी रखने की नई व्यवस्थाएं की गई हैं.

वित्त मंत्नी निर्मला सीतारमण के द्वारा पेश किया गया आगामी वित्त वर्ष 2021-22 का बजट कोविड-19 के कारण आजादी के बाद से अब तक की सबसे अधिक आर्थिक निराशाजनक पृष्ठभूमि की चुनौतियों के बीच भी सबसे अधिक आर्थिक उम्मीदों भरा बजट दिखाई दे रहा है.

इस अभूतपूर्व बजट के माध्यम से वित्त मंत्नी ने विभिन्न वर्गो और विभिन्न सेक्टरों के लिए भारी-भरकम राशि आवंटित करते हुए राजकोषीय घाटे (फिजिकल डेफिसिट) को जीडीपी के 6.8 फीसदी तक विस्तारित करने में कोई संकोच नहीं किया है.

नए बजट की तस्वीर में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कोविड-19 से निर्मित अप्रत्याशित आर्थिक सुस्ती का मुकाबला करने और विभिन्न वर्गों को राहत देने के लिए बड़े पैमाने पर आवंटन बढ़ाए गए हैं. रोजगार के नए अवसर पैदा करने के प्रयास किए गए हैं. तेजी से घटे हुए निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए आकर्षक प्रावधान किए गए हैं.

क्रेडिट सपोर्ट को जारी रखने की नई व्यवस्थाएं की गई

बैंकों में लगातार बढ़ते हुए एनपीए को नियंत्रित करने और क्रेडिट सपोर्ट को जारी रखने की नई व्यवस्थाएं की गई हैं. नए बजट में महंगाई पर नियंत्नण और नई मांग का निर्माण करने की रणनीति है. कोरोना वायरस से बचाव के लिए टीकाकरण एवं अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च में भारी वृद्धि की गई है.

वित्त मंत्नी सीतारमण वित्त वर्ष 2021-22 के बजट से खेती और किसानों को विशेष रूप से लाभान्वित करते हुए दिखाई दी हैं. नए बजट में किसानों के लिए सरल कर्ज हेतु 16.5 लाख करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है. किसानों को उनकी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से डेढ़ गुना ज्यादा कीमत दी जानी निर्धारित की गई है.

सरकार ने ऐसे नए उद्यमों तथा कृषि बाजारों को प्रोत्साहन दिया है, जिनसे कृषि उत्पादों को लाभदायक कीमत दिलाने में मदद करने के साथ उपभोक्ताओं को ये उत्पाद मुनासिब दाम पर पहुंचाने में मदद हो सके. वित्त मंत्नी ने इस बार एमएसएमई को 15700 करोड़ का बड़ा प्रभावी बजट दिया है. छोटे उद्योग की परिभाषा बदली गई है. कोरोना काल के दौरान जो एमएसएमई एनपीए हो गए हैं, उनके लिए भी वित्त मंत्नी नया रास्ता निकालते हुए दिखाई दी हैं.

एमएसएमई के कारोबार को नया रंग-रूप मिलते हुए दिखाई दे सकेगा

बजट में सरकार की तरफ से तकनीक की सुविधा मुहैया होने से एमएसएमई के कारोबार को नया रंग-रूप मिलते हुए दिखाई दे सकेगा. हालांकि वर्ष 2021-22 के बजट से छोटे आयकरदाताओं और मध्यम वर्ग को मुस्कराहट नहीं मिली है. वित्त मंत्नी ने टैक्स स्लैब में कोई राहत नहीं दी है.

स्पष्ट है कि कोविड-19 ने छोटे आयकरदाताओं और मध्यम वर्ग की आर्थिक चुनौतियां बढ़ाई हैं. मौजूदा समय में धारा 80सी के तहत 1.50 लाख रु. की छूट मिलती है. इसके तहत ईपीएफ, पीपीएफ, एनएससी, जीवन बीमा, बच्चों की ट्यूशन फीस और होम लोन का मूलधन भुगतान शामिल है. मकानों की बढ़ती हुई कीमत को देखते हुए धारा 80सी के तहत 1.50 लाख की छूट पर्याप्त नहीं है.

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