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अब कर सुधार के जरिए मिलेगी राहत और आर्थिक रफ्तार

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: August 23, 2025 05:18 IST

GST and Income Tax Law: 20 और 21 अगस्त को नई दिल्ली में जीएसटी काउंसिल की तरफ से गठित मंत्रिसमूह की बैठक में व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी को जीएसटी से छूट देने के प्रस्ताव का समर्थन किया गया है.

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ठळक मुद्देइनकम टैक्स कानून को आसान और राहतकारी बनाने के लिए भी तेजी से आगे बढ़ी है. तीन साल तक व्यापक मूल्यांकन और विश्लेषण के बाद जीएसटी में सरलता का प्रस्ताव तैयार किया है.घटाकर 5 फीसदी और 18 फीसदी स्लैब वाले दो-स्तरीय जीएसटी का प्रस्ताव किया है.

GST and Income Tax Law: इस समय केंद्र सरकार के द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और इनकम टैक्स कानून में आमूल सुधार के जरिए लोगों को बड़ी राहत देने और अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की डगर पर प्रभावी कदम आगे बढ़ाए जा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर जीएसटी में बड़े बदलाव के ऐलान के बाद केंद्र ने अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों का मसौदा राज्यों को भेज दिया है और इसे शीघ्र लागू करने के लिए उनका सहयोग मांगा है. 20 और 21 अगस्त को नई दिल्ली में जीएसटी काउंसिल की तरफ से गठित मंत्रिसमूह की बैठक में व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी को जीएसटी से छूट देने के प्रस्ताव का समर्थन किया गया है. साथ ही दो स्लैब वाले जीएसटी को मंजूरी दी गई है.

इसी तरह सरकार इनकम टैक्स कानून को आसान और राहतकारी बनाने के लिए भी तेजी से आगे बढ़ी है. हाल ही में 11 अगस्त को लोकसभा में पारित इनकम टैक्स बिल 2025 अब राज्यसभा में पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन जाएगा. गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने विगत तीन साल तक व्यापक मूल्यांकन और विश्लेषण के बाद जीएसटी में सरलता का प्रस्ताव तैयार किया है.

सरकार ने मौजूदा चार टैक्स स्लैब- 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी में बदलाव करते हुए इन्हें घटाकर 5 फीसदी और 18 फीसदी स्लैब वाले दो-स्तरीय जीएसटी का प्रस्ताव किया है. हालांकि अहितकर वस्तुओं की श्रेणी में आने वाली कुछ वस्तुओं पर 40 फीसदी कर स्लैब लागू रहेगा. अब जीएसटी सुधारों के तीन बड़े आधार होंगे.

एक, स्ट्रक्चरल सुधार. इसमें टैक्स ढांचे को और बेहतर किया जाएगा.  दो, टैक्स दरों को तर्कसंगत बनाना, ताकि जरूरी वस्तुएं सस्ती हो सकें तथा तीन, नए रजिस्ट्रेशन, रिफंड को आसान बनाना. इससे इनपुट और आउटपुट टैक्स रेट्स में संतुलन आएगा. 12 फीसदी के दायरे में आने वाली अधिकतम वस्तुएं 5 प्रतिशत टैक्स की श्रेणी में आ जाएंगी. उपकर (सेस) समाप्त हो जाएगा.

जिस तरह केंद्र सरकार जीएसटी में आमूल बदलाव की डगर पर आगे बढ़ी है उसी तरह सरकार इनकम टैक्स कानून को आसान और राहतकारी बनाने के लिए भी तेजी से आगे बढ़ी है. 11 अगस्त को लोकसभा में पारित इनकम टैक्स बिल 2025 अब राज्यसभा में पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन जाएगा.

यह कानून मौजूदा इनकम टैक्स कानून 1961 की जगह लेते हुए एक अप्रैल 2026 से लागू किया जा सकता है. वस्तुतः नया इनकम टैक्स कानून महज कुछ धाराओं का बदलाव नहीं, बल्कि पूरी टैक्स व्यवस्था का कायापलट होगा. उम्मीद करें कि जीएसटी और इनकम टैक्स कानून में नए बदलावों के कार्यान्वयन पर सरकार शुरुआत से ही इस तरह ध्यान देगी कि इन कानूनों की सरलता से देश के करोड़ों लोग लाभान्वित हों और भ्रष्टाचार भी नियंत्रित हो.

उम्मीद करें कि अहम कर सुधारों से करदाताओं की संख्या बढ़ाने, टैक्स जटिलता और मुकदमों में कमी लाने और टैक्स संग्रहण बढ़ाने में महत्वपूर्ण उपयोगिता मिलेगी. उम्मीद करें कि कर कानूनों में सुधारों से तेजी से बढ़ने वाला कर संग्रहण देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में भी अहम भूमिका निभाते हुए दिखाई देगा.

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