पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने भी चेतावनी जारी कर कहा था कि यदि रेत का खनन नियंत्रित नहीं किया गया तो इसका संकट पैदा हो जाएगा. रेत बनने में सैकड़ों साल लगते हैं, लेकिन इससे भी ज्यादा तेजी से इसका भंडार खाली हो रहा है. ...
आपको बता दें कि सरकारी रिकॉर्ड के हिसाब से मुल्क में आजादी के समय लगभग 24 लाख तालाब थे। लेकिन उन में से आज कितनी सही हालत में है और कितनी खत्म ही हो गए, यह एक गौर करने की बात है। ...
यदि शहर में गर्मी की मार से बचना है तो अधिक से अधिक पारंपरिक पेड़ों को रोपना जरूरी है, साथ ही शहर के बीच बहने वाली नदियां, तालाब, जोहड़ आदि यदि निर्मल व अविरल रहेंगे तो बढ़ी गर्मी को सोखने में ये सक्षम होंगे। ...
खेती के समक्ष सबसे खतरनाक चुनौती - जलवायु परिवर्तन और खेती के घटते रकबे पर कम ही बातें होती हैं. अब बहुत देर नहीं है जब किसान के सामने बदलते मौसम के कुप्रभाव उसकी मेहनत और प्रतिफल के बीच खलनायक की तरह खड़े दिखेंगे. ...
नेशनल सैंपल सर्वे आफिस (एनएसएसओ) की ताजा 76वीं रिपोर्ट के मुताबिक देश में 82 करोड़ लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी मिल रहा है. देश के महज 21.4 फीसदी लोगों को ही घर तक सुरक्षित जल उपलब्ध है. ...
अनुभवों से यह तो स्पष्ट है कि भारी-भरकम बजट, राहत, नलकूप जैसे शब्द जलसंकट का निदान नहीं हैं. करोड़ों-अरबों की लागत से बने बांध सौ साल भी नहीं चलते, जबकि हमारे पारंपरिक ज्ञान से बनी जल संरचनाएं ढेर सारी उपेक्षा, लापरवाही के बावजूद आज भी पानीदार हैं. ...
अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन समय-समय पर घुसपैठ और बयानबाजी करता रहा है और अब वह इस इलाके में अस्थिरता के लिए छोटे आतंकी गुटों को शह दे रहा है। बीते कुछ सालों में अलगाववादी संगठनों पर बढ़े दबाव और उनके साथ हुए समझौतों ने माहौल को शांत बनाया है। ...