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तालिबान ने रमजान के महीने के दौरान संगीत बजाने के आरोप में रेडियो स्टेशन को बंद किया, महिलाओं द्वारा संचालित था स्टेशन

By शिवेंद्र कुमार राय | Updated: April 1, 2023 21:50 IST

कब्जे के बाद तालिबान ने यह कहा था कि वे पिछले समय की तुलना में उदार होंगे, लेकिन कट्टरता के कारण धीरे-धीरे महिलाओं के अधिकारों को कुचलना भी शुरू कर दिया गया।

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ठळक मुद्देतालिबान का अफगानिस्तान में महिलाओं को निशाना बनाना जारीमहिलाओं द्वारा संचालित एक रेडियो स्टेशन को बंद कियारमजान के पवित्र महीने के दौरान संगीत बजाने का आरोप

नई दिल्ली: अगस्त 2021 में तालिबान द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के बाद से ही अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों को कुचलने का दौर जारी है। हाल ही में तालिबान ने रमजान के पवित्र महीने के दौरान संगीत बजाने के लिए अफगानिस्तान में महिलाओं द्वारा संचालित एक रेडियो स्टेशन को बंद कर दिया गया है। 

समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार महिलाओं द्वारा संचालित स्टेशन का नाम सदाई बनोवन है जिसका अर्थ है महिलाओं की आवाज। रेडियो स्टेशन 10 साल पहले शुरू हुआ था और इसमें आठ लोगों का स्टाफ है, जिनमें से छह महिलाएं हैं।

इस बारे में तालिबान सरकार के अधिकारी और बदख्शां प्रांत में सूचना और संस्कृति के निदेशक मोइज़ुद्दीन अहमदी ने कहा कि  रमजान के दौरान गाने और संगीत बजाकर कई बार "इस्लामी अमीरात के कानूनों और नियमों" का उल्लंघन किया गया। मोइज़ुद्दीन अहमदी ने कहा, "अगर यह रेडियो स्टेशन अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात की नीति को स्वीकार करता है और गारंटी देता है कि वह ऐसी बात दोबारा नहीं दोहराएगा, तो हम इसे फिर से संचालित करने की अनुमति देंगे।"

इस बीच रेडियो स्टेशन की प्रमुख नाजिया सोरोश ने तालिबान प्रशासन के उन आरोपों का खंडन किया है जिसमें कानून तोड़ने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि रेडियो चैनल बंद करने की कोई आवश्यकता नहीं थी और इसे "षड्यंत्र" कहा। नाजिया सोरोश ने कहा कि संगीत बजाने का आरोप झूठा है हमने  किसी भी तरह का संगीत प्रसारित नहीं किया है।

बता दें कि कब्जे के बाद तालिबान ने यह कहा था कि वे पिछले समय की तुलना में उदार होंगे, लेकिन कट्टरता के कारण धीरे-धीरे महिलाओं के अधिकारों को कुचलना भी शुरू कर दिया गया। तालिबान सरकार ने लड़कियों और महिलाओं के लिए शिक्षा तथा रोजगार के अवसर मुहैया कराये जाने पर पाबंदियां लगा दी हैं। अमेरिका ने 20 साल की जंग के बाद अफगानिस्तान से अपनी सेना को वापस बुला लिया था और ऐसे हालात बने थे।

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