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यूक्रेन युद्ध: रूसी विमानन सेवा के ठप होने के आसार, हवाई जहाज बनाने वाली कंपनी 'बोइंग' और 'एयरबस' ने रूसी एयरलाइन को कल-पूर्जों की आपूर्ति रोकी

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: March 2, 2022 19:54 IST

 'बोइंग' और 'एयरबस' ने रूसी एयरलाइंस को जहाज मेंटेनेंस से संबंधित कल-पुर्जों की आपूर्ति को रोकने का ऐलान ऐसे समय में किया जब अमेरिका ने मंगलवार की देर रात यूरोपीय संघ के नक्शे कदम पर चलते हुए अपने हवाई क्षेत्र में रूसी उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया है।

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ठळक मुद्देएयरबस ने रूसी एयरलाइनों को कल-पुर्जों और अन्य सेवाओं की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से रोक दी है रूसी एयरलाइन के बेड़े में अभी कुल 332 बोइंग और 304 एयरबस हवाई जहाज शामिल हैंरूस में इस समय कुल 515 विमान विदेशी कंपनियों से लीज पर हैं

वाशिंगटन:यूक्रेन-रूस युद्ध के सातवें दिन हवाई जहाज बनाने वाली कंपनी 'बोइंग' और 'एयरबस' ने घोषणा की है कि वो रूसी एयरलाइंस को जहाज मेंटेनेंस से संबंधित कल-पुर्जों की आपूर्ति को तत्काल रोक रहा है।

दोनों कंपनियों ने रूसी एयरलाइंस के खिलाफ यह कठोर फैसला रूसी सेना द्वारा यूक्रेन पर हमले के संबंध में लिया गया है। 'बोइंग' और 'एयरबस' ने यह ऐलान ऐसे समय में किया जब अमेरिका ने मंगलवार की देर रात यूरोपीय संघ के नक्शे कदम पर चलते हुए अपने हवाई क्षेत्र में रूसी उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया।

बोइंग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कंपनी ने मौजूदा समय तनाव के हालात को देखते हुए उसके अनुसंधान और इंजीनियरिंग केंद्र ने रूसी एयरलाइंस से संबंधित सारे कार्यों को रोक दिया है।

वहीं एयरबस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वह रूसी एयरलाइनों को कल-पुर्जों और अन्य सेवाओं की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से रोक रही है, लेकिन इसके साथ कंपनी इस बात का भी आंकलन कर रही है कि एयरबस के मॉस्को स्थित इंजीनियरिंग केंद्र से सेवाएं को जारी रखा जाए कि उसे बी बंद कर दिया जाए।

नये घटनाक्रम के मुताबिक इन प्रतिबंधों से रूसी एयरलाइंस दुनिया में पूरी तरह से अलग-थलग हो जाएगी, जैसे साल 2018 तक अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान की स्थिति थी।

मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि रूस के खिलाफ लगे प्रतिबंध ईरान या उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंधों की तुलना में अधिक भयंकर परिणाम हो सकते हैं क्योंकि इससे एक बड़े हवाई बाजार पर व्यापक अपर पड़ने की संभावना है।

बताया जा रहा है कि पश्चिमी साझेदार भी रूसी जहाजों से संचालित जेट विमानों को वापस लेना चाहते हैं, जिसके कारण रूसी विमानन क्षेत्र लगभग-लगभग उत्तर कोरिया और ईरान के समान हो जाएगा और आंकलन तो यहां तक है कि रूसी विमानन क्षेत्र पुराने सोवियत शासन के दौर के आसपास चला जाएगा।

आईबीए के अनुसार रूस की साल 2021 में एयरलाइन क्षमता का लगभग 6 फीसदी थी, जो साल 2019 में कोरोना महामारी के बाद 4 फीसदी के ऊपर पहुंची थी। रूसी एयरलाइन के बेड़े में अभी कुल 332 बोइंग और 304 एयरबस हवाई जहाज शामिल हैं, जो रूस विमानन सेवा के लगभग दो तिहाई हैं।

रूसी हवाई सेवा में बहुत बड़ा योगदान जेटलाइनर का है, जिसकी हर छह साल में मेंटेनेंस की जाती है। इन विमानों में सैकड़ों हजारों सेक्शन होते हैं। और विमान को उड़ान भरने की अनुमति के लिए कुछ हिस्सों का बिल्कुल सही होना एकदम जरूरी होता है।

रूसी एयरलाइनों के विमानों विदेशों में भी मरम्मत नहीं कराया जा सकता क्योंकि अमेरिका ने रूसी बैंकों को स्विफ्ट अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली को रोक दिया है। बताया जा रहा है कि कई रूसी एयरलाइंस विमानों के कल-पुर्जों का री-यूज करती हैं, लेकिन बीते दौर में उन विमानों के क्रैश हो जाने और लोगों के मारे जाने का बुरा इतिहास रहा है।

इस मामले में आईबीएके टेक्निकल मैनेजिंग डायरेक्टर पीटर वाल्टर ने कहा, "चूंकि विमान के कल-पुर्जे सीमित होते हैं, इसलिए रूसी विमान हवा में नहीं बल्कि जमीन पर खड़े रहेंगे।" बताया जा रहा है कि रूस में इस समय कुल 515 विमान विदेशी कंपनियों से लीज पर हैं।

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