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अमेरिका में 'अनबॉम्बर' के नाम से कुख्यात 'टेड काक्ज़िन्स्की' की जेल में रहस्यमयी मौत

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: June 12, 2023 07:35 IST

अमेरिका में लगभग डेढ़ दशक तक दहशत के पर्याय रहे टेड काक्जिन्स्की ने 81 वर्ष की अवस्था में अमेरिका की जेल में शनिवार को आत्महत्या कर ली है। काक्जिन्स्की ने 17 साल बमबाजी का ऐसा अभियान चलाया था कि अमेरिका में वो 'अनबॉम्बर' के नाम से कुख्यात थे।

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ठळक मुद्देअमेरिका के कुख्यात बमबाज टेड काक्जिन्स्की ने जेल में आत्महत्या की काक्जिन्स्की ने 17 साल बमबाजी का ऐसा अभियान चलाया था कि पूरा अमेरिका दहशत में था दिमाग से तेज काक्ज़िनस्की को महज 16 साल की उम्र में हार्वर्ड में एडमिशन मिल गया था

न्यूयॉर्क: अमेरिका में लगभग डेढ़ दशक तक दहशत के पर्याय रहे टेड काक्जिन्स्की ने 81 वर्ष की अवस्था में अमेरिका की जेल में शनिवार को आत्महत्या कर ली है। काक्जिन्स्की ने 17 साल बमबाजी का ऐसा अभियान चलाया था कि अमेरिका में वो 'अनबॉम्बर' के नाम से कुख्यात थे। उनकी इस दशहतगर्दी ने तीन लोगों की जान ले ली थी और 23 लोग उनकी सनक के कारण जख्मी हो गये थे।

एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के अनुसार कैंसर से पीड़ित काक्ज़िनस्की शनिवार की दोपहर 12:30 बजे के आसपास उत्तरी कैरोलिना के बटर में फेडरल मेडिकल सेंटर के अपने सेल में अचेत पाए गए। उनकी सुरक्षा में मौजूद लोगों ने फौरन मेडिकल टीम को सूचित किया। जिसके बाद उन्हें होश में लाने के लिए सामान्य आपातकालीन प्रक्रिया के तहत सीपीआर दिया गया लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए और मृत घोषित कर दिया गया।

काक्ज़िनस्की की मृत्यु तब होती है जब संघीय कारागार ब्यूरो ने धनी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन की मृत्यु के बाद पिछले कई वर्षों में जांच में वृद्धि का सामना किया है, जिनकी 2019 में एक संघीय जेल में आत्महत्या से भी मृत्यु हो गई थी।

काक्ज़िनस्की मई 1998 से कोलोराडो में फेडरल सुपरमैक्स जेल फ्लोरेंस में रखा गया था। उन्हें अमेरिका में चलाये गये आतंकी अभियान के लिए चार उम्रकैद और 30 साल की सजा सुनाई गई थी। काक्ज़िनस्की ने अदालत में स्वयं स्वीकार किया था कि साल 1978 से साल  1995 के बीच उन्होंने कुल 16 बम विस्फोट किये थे, जिसके कारण 3 लोगों की जान गई थी और कई पीड़ित स्थायी रूप से अपंग हो गए थे।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से गणित की पढ़ाई करने वाले काक्ज़िनस्कीव को ग्रामीण मोंटाना से उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वो एक बेहद गंदे प्लाईवुड के केबिन में एकाकी जीवन जी रहे थे। साल 1978 से 1995 के बीच काक्ज़िनस्की ने मोंटाना से डॉक बम के जरिये इतने विस्फोट किये थे कि उनकी दहशत से अमेरिका में डाक भेजने के तरीकों को बदलना पड़ा था।

उनके बम के निशाने पर अध्यापक, एयरलाइंस, कंप्यूटर दुकान के मालिक, एक विज्ञापन कंपनी में काम करने वाले कार्यकारी और एक लकड़ी उद्योग के लोग शामिल थे। 1993 में काक्ज़िनस्की ने कैलिफोर्निया के एक जेनेटिक साइंटिस्ट और येल यूनिवर्सिटी के एक कंप्यूटर विशेषज्ञ को अपने बम से दो दिनों के भीतर अपाहिज बना दिया था।

उसके दो साल बाद उन्होंने 'न्यू यॉर्क टाइम्स' और 'वाशिंगटन पोस्ट' को आधुनिक जीवन और प्रौद्योगिकी के खिलाफ अपने 35 हजार शब्दों का एक आर्टिकल प्रकाशित करने के लिए कॉल किया और कहा कि अगर उनका लेख प्रकाशित होता है तो वह हिंसा का रास्ता छोड़ देंगे। यहीं पर काक्ज़िनस्की के भाई डेविड और उनकी पत्नी लिंडा पैट्रिक ने काक्ज़िनस्की की आवाज को पहचान लिया और एफबीआई को इत्तला दे दी, जो बीते डेढ़ दशक से काक्ज़िनस्की की तलाश कर रही थी।

एफबीआई के अधिकारी अप्रैल 1996 में काक्ज़िनस्की को मोंटाना के बाहरी इलाके में एक छोटे प्लाईवुड के बने केबिन से गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान काक्ज़िनस्की के केबिन से पुरानी पत्रिकाएं, एक कोडवर्ड में लिखी डायरी, विस्फोटक सामग्री और दो बम बरामद हुए।

मुकदमे के दौरान काक्ज़िनस्की ने साल 1998 में आत्महत्या का प्रयास किया। उसके बाद उनका मनोचिकित्सक से इलाज कराया गया लेकिन काक्ज़िनस्की ने इस बात को मानने से हमेशा इनकार किया कि वो मानसिक रूप से बीमार नहीं हैं और अंततः उन्हें अदालत द्वारा दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई।

शिकागो में पले-बढ़े काक्ज़िनस्की को 16 साल की उम्र में ही हार्वर्ड में पढाई के लिए एडमिशन मिल गया था। उनका दिमाग अभूतपूर्व रूप से तेज था। हार्वर्ड में काक्ज़िनस्कीव के कई पत्र प्रतिष्ठित गणित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए थे।

टॅग्स :अमेरिकाक्राइम
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