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South Africa: 4 मंजिला मंदिर के ढहने से हादसा, एक भारतीय समेत चार की मौत

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: December 14, 2025 12:17 IST

South Africa: अहोबिलम मंदिर के नाम से जाना जाने वाला यह मंदिर एक गुफा की तरह बनाया गया है जिसमें वहां मौजूद पत्थरों के अलावा भारत से लाए पत्थरों का उपयोग किया जा रहा था।

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South Africa: दक्षिण अफ्रीका के क्वाजुलु-नताल प्रांत में निर्माणाधीन चार मंजिला मंदिर ढहने की घटना में मारे गए चार लोगों में भारतीय मूल का 52 वर्षीय व्यक्ति भी शामिल है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। ईथेक्विनी (पूर्व में डरबन) के उत्तर में रेडक्लिफ की एक खड़ी पहाड़ी पर स्थित ‘न्यू अहोबिलम टेंपल ऑफ प्रोटेक्शन’ का विस्तार किया जा रहा था तभी शुक्रवार को इमारत का एक हिस्सा ढह गया। माना जा रहा है कि मलबे के नीचे श्रमिक और मंदिर के अधिकारी दबे हैं लेकिन अभी उनकी सटीक संख्या का पता नहीं चल पाया है।

शुक्रवार को एक मजदूर और एक श्रद्धालु सहित दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी। बचाव दल द्वारा और शव बरामद किए जाने के बाद शनिवार को मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गई। स्थानीय मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि चार मृतकों में से एक की पहचान विक्की जयराज पांडे के रूप में हुई है जो मंदिर न्यास के कार्यकारी सदस्य और निर्माण परियोजना के प्रबंधक थे।

खबरों के मुताबिक, पांडे लगभग दो साल पहले मंदिर की स्थापना के समय से ही इसके विकास कार्यों में शामिल थे। मंदिर से संबद्ध धर्मार्थ संस्था ‘फूड फॉर लव’ के निदेशक सनवीर महाराज ने पुष्टि की कि मंदिर के ढहने की घटना में मारे गए लोगों में पांडे भी शामिल थे। दक्षिण अफ्रीका की प्रतिक्रिया इकाई के प्रवक्ता प्रेम बलराम ने स्थानीय मीडिया को बताया कि बचाव अभियान दो दिन से जारी है और बचावकर्मियों को एक अन्य शव होने का पता चला है लेकिन उन्हें खराब मौसम के कारण शनिवार दोपहर अभियान रोकना पड़ा।

उन्होंने कहा, ‘‘इस समय यह पुष्टि नहीं की जा सकती कि मलबे के नीचे और भी लोग फंसे हुए हैं या नहीं।’’ ईथेक्विनी (पूर्व में डरबन) की नगरपालिका ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि मंदिर के निर्माण के लिए कोई भवन योजना स्वीकृत नहीं की गई है यानी यह निर्माण कार्य अवैध था। अहोबिलम मंदिर के नाम से जाना जाने वाला यह मंदिर एक गुफा की तरह बनाया गया है जिसमें वहां मौजूद पत्थरों के अलावा भारत से लाए पत्थरों का उपयोग किया जा रहा था।

मंदिर का निर्माण करा रहे परिवार ने बताया कि निर्माण कार्य लगभग दो साल पहले शुरू हुआ था और इसमें भगवान नरसिंहदेव की दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति स्थापित किए जाने का कार्यक्रम था। क्वाजुलु-नताल प्रांत के ‘कोऑपरेटिव गवर्नेंस’ और पारंपरिक मामलों के मंत्री थुलासिज्वे बुथेलेजी ने शनिवार को घटनास्थल का दौरा किया और वादा किया कि बचाव अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक जरूरी होगा। 

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