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स्पेन से शरण नहीं मांगी, वापस देश लौटूंगा: क्यूबा के प्रमुख लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता

By भाषा | Updated: November 18, 2021 19:56 IST

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मैड्रिड (स्पेन), 18 नवंबर (एपी) क्यूबा में सरकार के कथित दबाव की वजह से देश छोड़ कर स्पेन पहुंचे लोकतंत्र समर्थक एक प्रमुख कार्यकर्ता का कहना है कि उनका इरादा यूरोपीय देश में बसने का नहीं है और वह अपने वतन लौटेंगे।

उन्होंने पत्नी के साथ स्पेन पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद यह बात कही और बताया कि क्यूबा में सरकार और उसके समर्थकों का दबाव असहनीय हो गया था।

नाटककार युनिअर गार्सिया ने साथी कार्यकर्ताओं को इस बात को लेकर सफाई दी है कि ‘आर्कपेलगो क्यूबा’ के सदस्यों से सलाह-मशविरा किए बना उन्होंने मुल्क छोड़ने का फैसला क्यों किया। ‘आर्कपेलगो क्यूबा’ चर्चा का एक ऑनलाइन मंच है जिसके फेसबुक पर 25,000 से ज्यादा फोलोअर हैं।

समूचे क्यूबा में सोमवार को सरकार विरोधी प्रदर्शनों के पीछे यह मंच था।

क्यूबा की सरकार ने मार्च को प्रतिबंधित कर दिया है और सरकार के समर्थकों ने प्रदर्शनों के आयोजकों को घरों को घेर लिया ताकि ने प्रदर्शन में हिस्सा ने ले सकें।

कार्यकर्ताओं ने कहा है कि क्यूबा की पुलिस ने उन्हें चेतावनी दी है कि अगर वे सड़कों पर उतरेंगे तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

गार्सिया ने बुधवार रात को क्यूबा के फिल्म निदेशक इयान पैड्रोन को दिए साक्षात्कार में कहा, “ मैं मशीन नहीं हूं। मैं इंसान हूं। पिछले कुछ दिन मेरे अंदाज़े से भी ज्यादा मुश्किल थे। ”

यह साक्षात्कार नाटकाकर और उनकी पत्नी डायना प्रीएतो के मैड्रिड पहुंचने के बाद लिया गया था और इसे यूट्यूब पर लाइव प्रसारित किया गया था।

गार्सिया ने कहा, “ मुझे चुप कराए जाने से बचने का सिर्फ एक तरीका था कि मैं वहां से भाग जाऊं।’’

एक राजनयिक सूत्र ने ‘एसोसिएटिड प्रेस’ को बताया कि गार्सिया को हवाना में स्थित स्पेन के दूतावास ने तत्काल आधार पर पर्यटन वीज़ा जारी किया था जिसके बाद वह अपनी पत्नी के साथ बुधवार को मैड्रिड के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे।

कार्यकर्ता ने कहा कि उन्होंने स्पेन से शरण नहीं मांगी है और वे वापस क्यूबा जाएंगे।

अमेरिका पर लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं को भड़काने का आरोप लगाने वाले क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने कहा कि गार्सिया और प्रीएतो का देश छोड़ने का फैसला निजी है और इसका क्यूबा और स्पेन की सरकारों के बीच हुए समझौते से कोई लेना देना नहीं है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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