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चीन ने क्या 'एलियंस' से आने वाले संकेतों की कर ली पहचान? प्रकाशित रिपोर्ट में दावा फिर किया गया डिलीट

By विनीत कुमार | Updated: June 15, 2022 13:12 IST

चीन की साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेली की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके वैज्ञानिकों ने संभवत: एलियन सभ्यताओं के संकेतों की पहचान कर ली है। हालांकि इस रिपोर्ट को बाद में डिलीट कर दिया गया।

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बीजिंग: चीन की सरकार को समर्थित स्थानीय साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेली की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने कहा कि उसके विशाल स्काई-आई टेलीस्कोप (Sky Eye telescope) ने संभवत: एलियन सभ्यताओं के सिग्नल की पहचान कर ली है। हालांकि इस खोज के बारे में कुछ देर बाद ही प्रकाशित रिपोर्ट को साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेली द्वारा डिलीट कर दिया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के सबसे बड़े रेडियो टेलीस्कोप स्काई आई द्वारा पता लगाया गया नैरो-बैंड इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल इससे पहले के तमाम मिले सिग्नल से अलग है टीम इस संबंध में आगे की जांच कर रही है। रिपोर्ट में एक्सट्राटेरेस्ट्रियल सिविलाइजेशन सर्च टीम के मुख्य वैज्ञानिक झांग टोन्जी के हवाले ये जानकारी दी गई थी। इसकी सह-स्थापना बीजिंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी, चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज की नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले द्वारा की गई है।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि चीन के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आधिकारिक समाचार पत्र साइंस एंड टेक्नोलॉजी डेली की वेबसाइट से रिपोर्ट को क्यों हटा दिया गया। वैसे इसके प्रकाशित होने के साथ ही और डिलिट किए जाने से पहले ये खबर सोशल नेटवर्क वीबो पर ट्रेंड करना शुरू हो गया था। साथ ही सरकार समर्थित सहित अन्य मीडिया आउटलेट्स ने भी इसे प्रकाशित किया था।

स्काई आई चीन के दक्षिण-पश्चिमी गुइझोउ प्रांत में स्थित है और इसका व्यास 500 मीटर (1,640 फीट) है। इसने सितंबर 2020 में आधिकारिक तौर पर अलौकिक जीवन (extraterrestrial life) की खोज की शुरुआत की थी। रिपोर्ट के अनुसार झांग ने कहा कि टीम ने 2019 में एकत्र किए गए डेटा की जांच करते हुए 2020 में संदिग्ध संकेतों के दो सेटों का पता लगाया था। इसके बाद 2022 में एक्सोप्लैनेट टार्गेट के डेटा से एक और संदिग्ध संकेत मिला।

झांग ने कहा है कि चीन की स्काई आई बेहद कम फ्रिक्वेंसी रेडियो बैंड के मामले में भी बेहद संवेदनशील है और एलियन सभ्यताओं की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि हालांकि संदिग्ध संकेत किसी प्रकार के रेडियो हस्तक्षेप से भी उत्पन्न हो सकते हैं और इसलिए आगे की जांच की जरूरत है।

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