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चीन ने जिया की तिब्बत के लिए विशेष अमेरिकी संयोजक पद पर नियुक्ति खारिज की

By भाषा | Updated: December 21, 2021 18:35 IST

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(केजेएम वर्मा)

बीजिंग, 21 दिसंबर चीन ने अमेरिका द्वारा भारतीय मूल की राजनयिक अजरा जिया को तिब्बत के लिए अपना विशेष संयोजक नियुक्त करने पर मंगलवार को नाराजगी व्यक्त की। चीन ने कहा कि वह कभी जिया के पद को मान्यता नहीं देगा और यह उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है।

जिया को तिब्बत मामले का विशेष संयोजक नियुक्त करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा, ‘‘वह तिब्बत पर एक समझौते के समर्थन में चीन सरकार और दलाई लामा, उनके प्रतिनिधियों या लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित तिब्बती नेताओं के बीच बिना पूर्व शर्तों के ठोस बातचीत को बढ़ावा देगी।’’

जिया की नियुक्ति को लेकर किए गए सवाल का जवाब देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि तिब्बत का मामला ‘‘पूरी तरह से चीन का घरेलू मामला है, वे कोई विदेशी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ कथित तिब्बत मामले पर विशेष संयोजक की नियुक्ति कर अमेरिका चीन के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है।चीन इसे कड़ाई से खारिज करता है। हम कभी इस पद को स्वीकार नहीं करेंगे।’’

लिजियान ने कहा कि अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धता के तहत ठोस कदम उठाने चाहिए जिसके तहत वह स्वीकार करता है कि तिब्बत चीन का हिस्सा है। वह तिब्बत की आजादी का समर्थन नहीं करे और चीन के घरेलू मुद्दों में हस्तक्षेप नहीं करे। चीन अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास संबंधी हितों की रक्षा के लिए मजबूती से सभी कदमों को उठाना जारी रखेगा।’’

एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘मैं जोर देकर कहना चाहता हूं कि 70 साल पहले शांतिपूर्ण तरीके से तिब्बत को मुक्त कराने के बाद से तिब्बत सामाजिक सदभाव, आर्थिक समृद्धि और धार्मिक-सांस्कृतिक विकास का अनुभव कर रहा है।’’

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘वहां के लोग खुशहाल जीवन बिता रहे हैं और किसी अमेरिकी व्यक्ति को चिंता करने की जरूरत नहीं है एवं आलोचना की कोई गुंजाइश नहीं है। अगर अमेरिकी नेता कुछ बेहतर नहीं देख सकते तो उन्हें कुछ ध्यान अपने घर में गंभीर नस्लीय भेदभाव और मानवाधिकार की समस्या पर देना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि अमेरिका को तिब्बत पर विशेष संयोजक की नियुक्ति नहीं करनी चाहिए बल्कि अमेरिकन इंडियन (रेड इंडियन जो वहां के मूल निवासी थे) के जनसंहार, नस्लीय अल्पसंख्कों के मानवाधिकार के मामलों, कोविड-19 से निपटने में ढिलाई जिसकी वजह से बड़ी संख्या में मौतें हुई ,पर करनी चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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