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संयुक्त राष्ट्र में चीन ने शाहिद महमूद को वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचाया, भारत और अमेरिका के प्रस्ताव पर फिर लगाया अड़ंगा

By शिवेंद्र राय | Updated: October 19, 2022 15:36 IST

चीन ने भारत और अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के नेता शाहिद महमूद को वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है। इससे पहले भी चीन पुलवामा आतंकी हमले के मास्टर माइंड मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी और उसके संगठन जैश-ए-मोहम्मद को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित कराने की कोशिशों के खिलाफ अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल किया था।

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ठळक मुद्देभारत और अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र में लाया गया था प्रस्तावलश्कर-ए-तैयबा के नेता शाहिद महमूद को चीन ने बचायाचीन पहले भी कर चुका है पाकिस्तान परस्त आतंकियों का समर्थन

नई दिल्ली: चीन ने संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत और अमेरिका की आतंकरोधी कोशिशों को एक बार फिर झटका दिया है। भारत और अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के नेता शाहिद महमूद को वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव लाया गया था जिस पर चीन ने अड़ंगा लगा दिया है। यह पहला मामला नहीं है जब चीन ने पाकिस्तान की सरपरस्ती में पल रहे आतंकियों को बचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में अपनी शक्ति का इस्तेमाल किया हो। ये चौथी बार है जब चीन ने आतंकवादियों को ब्लैकलिस्ट करने से इंकार कर दिया है। अमेरिका और भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इसी साल अगस्त महीने में भी पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन के सदस्य अब्दुल रऊफ अजहर पर वैश्विक प्रतिबंध लगाए जाने और उसकी संपत्ति जब्त करने संबंधी प्रस्ताव पेश किया था जिस पर चीन ने रोक लगा दी थी।

साल  2019 में जब भारत ने पुलवामा आतंकी हमले के मास्टर माइंड मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी और उसके संगठन जैश-ए-मोहम्मद को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित कराने के लिए यूएनएससी में प्रस्ताव किया था तो चीन ने वीटो पावर लगा दिया था और आतंकवाद और पाकिस्तान के प्रति अपने प्रेम का इजहार किया था। तब भी यूएनएससी में चीन ऐसा कारनामा करने वाला अकेला देश था। 

वीगर मुद्दे पर भारत ने विरोध नहीं किया था

चीन ने भारत की कोशिशों को तब झटका दिया है जब हाल ही में वीगर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में चीन के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर भारत ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया था। इसे भारत के चीन को परोक्ष समर्थन के रूप में देखा गया था। दरअसल चीन पर लंबे समय से ये आरोप लगते रहे हैं कि वह शिनजियांग प्रांत में रह रहे वीगर मुसलानों का उत्पीड़न कर रहा है। इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई थी जिसमें दावा किया गया था कि चीन ने शिनजियांग प्रांत में बड़े पैमाने पर डिटेंशन कैंप बना रखे हैं जहां  पुनर्शिक्षा के नाम पर 10 लाख से ज्यादा वीगर मुसलमानों को कैद रखा गया है। 

भारतीय विदेश मंत्री चीन पर साध चुके हैं निशाना

पाकिस्तान परस्त आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र में बार-बार बचाने पर भारतीय विदेश मंत्री चीन को फटकार भी लगा चुके हैं। बीते सितंबर महीने में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र को संबोधित करते हुए चीन को कड़ा संदेश दिया था और कहा था कि भारत सीमा पार आतंकवाद से पीड़ित रहा है। हम आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेंगे। भारतीय विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र से आतंकवाद के प्रायोजक देशों और उन्हें बचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। बचाने वालों से जयशंकर का इशारा सीधा चीन की तरफ ही था।

टॅग्स :चीनसंयुक्त राष्ट्रअमेरिकाभारतपाकिस्तान
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