पटनाः सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में जारी नई मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) के तहत बिहार सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और शिक्षक न केवल शैक्षणिक गतिविधियों बल्कि स्कूल परिसर की साफ-सफाई और सुरक्षा की भी निगरानी करेंगे। मध्याह्न भोजन के बाद भटकते कुत्तों पर लगाम कसने की जिम्मेदारी खुद गुरुजी संभालेंगे। खासतौर पर मध्याह्न भोजन के बाद भोजन अवशेषों और कुत्तों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया गया है। शिक्षा विभाग ने साफ संदेश दे दिया है कि अब स्कूल परिसर में न तो जूठा बचेगा और न ही कुत्तों को भोजन मिलेगा।
निदेशक (मध्याह्न भोजन योजना) विनायक मिश्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब किसी भी विद्यालय में भोजन के बाद एक भी दाना खुला नहीं छोड़ा जाएगा। कुत्तों को जूठा देने की आदत पर पूरी तरह रोक लगेगी। बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छ वातावरण हमारी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भोजन समाप्त होते ही 15 से 20 मिनट के भीतर कक्षा-कक्ष, बरामदा, भोजनालय, हाथ धोने के स्थान और रसोई क्षेत्र की अनिवार्य सफाई कराई जाएगी। खाद्य अपशिष्ट को ढक्कन युक्त बर्तन या फूड वेस्ट बिन में संग्रहित कर प्रतिदिन विद्यालय परिसर से बाहर निपटान करना होगा।
खुले में कचरा या जूठा छोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। विनायक मिश्र ने कहा कि विद्यालय परिसर में किसी भी परिस्थिति में भटकते कुत्तों को भोजन देना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके लिए स्कूल के प्रवेश द्वार पर चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा।
इसके साथ ही मध्याह्न भोजन किचन के चारों ओर फेंसिंग, जाली या दरवाजे लगाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कुत्ते रसोई और भोजनालय तक न पहुंच सकें। शिक्षा विभाग का मानना है कि इन कदमों से न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि स्कूलों में स्वच्छता और अनुशासन की नई मिसाल भी कायम होगी। अब गुरुजी सिर्फ किताबें ही नहीं पढ़ाएंगे, बल्कि स्कूल परिसर के पहरेदार भी बनेंगे।