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नीतीश से जुदा होते ही प्रशांत किशोर ने बिहार में खोला नया मोर्चा

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 18, 2020 15:40 IST

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राजनीतिक रणनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर पटना में नये प्लान के साथ नजर आए. नेताओं को चुनाव लड़ाते लड़ाते वो खुद मैदान में हैं. 20 फरवरी से एक नया प्रोग्राम शुरू कर रहे हैं अब वो बात बिहार की करेंगे. जेडीयू से निकाले जाने से पहले भी बिहार की राजनीति कर रहे थे लेकिन व्यापार देश भर में.20 फरवरी से प्रशांत किशोर का बिहार वाली बात शुरू होगी. जिसके जरिए वो बिहार को देश के 10 सबसे बेहतर राज्यों में लाना चाहते हैं. साथ ही जेडीयू से निकाले जाने की टीस बी साफ दिखती है निशाने पर थे सीधे नीतिश कुमार. अदावत नयी और गर्म थी तो निशाना भी नीतीश ही थे. मुद्दा नागरिकता कानून और एनआरपी पर नीतिश की बीजेपी वाली लाईन. किशोर कहते हैं कि हम वो नेता चाहते हैं जो बिहार को लिए अपनी बात कहने में किसी के पिछलग्गू ना बने. प्रशांत किशोर इतने दिनों से नेताओं के गेम बनाते बिगाड़ते हैं वो और जेडूयू में बिताए साल ने उन्हें पक्का नेता बना दिया है. वो जानते हैं किसी से दोस्ती टूटे तो टूटे दुश्मनी मत करों . रास्ते खोल कर रखो तभी तो नीतीश पर निशाना और श्रद्धा एक साथ बरसा रहे है. जेडीयू से बेदखली के सवाल पर कहते हैं मेरे नीतीश जी से अच्छे रिश्ते हैं. मेरे दिल में उनके लिए बहुत इज्जत हैं. वह मेरे पिता के समान हैं और उन्होंने मुझे अपने बेटे की तरह माना है. मैं उनके फैसले पर सवाल नहीं उठाउंगा. नीतीश पर थोड़ा और शहद भी बरसाया और सवाल भी उठाए. कहते है कि बिहार में पिछले 15 वर्ष में विकास हुआ है, लेकिन उस स्पीड से नहीं जिस स्पीड से होना चाहिए . बिहार 2005 में सबसे गरीब राज्य था और अब भी है. नीतीश कुमार के शासन के मॉडल पर प्रश्न उठाने वाला कोई नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने नीतीश के साथ छोड़ने के लिए दो वजहें बताई है.  पहली वजह विचारधारा की लड़ाई को बताया है . बोले गांधी व गोडसे साथ नहीं हो सकते हैं.  जब वो नीतीश जी का मकी बात कर रहे थे तो ये बी गिनाया कि उन्होंने  साइकिल बांटी, पोशाक भी दिए, मगर अच्छी शिक्षा नहीं दे पाए. शिक्षा के मामले में बिहार आज भी नीचले स्तर का राज्य है. साथ ही एक कड़वा सवाल पूछा कि दिल्ली में 40 से ज्यादा लोग जलकर मर गए. ज्यादातर लोग बिहार-यूपी के थे. अगर 15 साल में खूब तरक्की हुई है तो फिर बिहार के लोग वहां जाकर क्यों मर रहे हैं. वो कहते हैं कब तक लालू राज की बाते कर के काम चालेंगे.  लोग ये सुनकर थक गए हैं कि लालू राज में ये खराब था, वो खराब था. बिहार के लिए प्रशांत किशोर ने एक सपना भी बेचा. वो कहते हैं कि बिहार हमेशा पोस्टकार्ड वाला ही राज्य बना रहे, यह मैं नहीं चाहता हूं.  फेसबुक और ट्विटर पर सिर्फ गुजरात के लोगों का एकाधिकार नहीं. गुजरात के लोगों को सीखाने वाले भी बिहार के ही थे मैं चाहता हूं कि बिहार के लड़के भी ट्विटर और फेसबुक चलाएं. इसके अलावा दिल्ली में सत्ताधारी दल आम आदमी पार्टी की तारीफ करते कर रहे हैं कि उसने सीएए और एनआरसी पर  स्टैंड लिया.नेता रहे प्रशांत किशोर कहते है 'मैं यहां किसी राजनीतिक पार्टी का ऐलान नहीं करने जा रहा हूं या किसी गठबंधन के काम में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है. प्रशांत किशोन ने 2014 में नरेंद्र मोदी के साथ काम किया,  2015 में नीतीश कुमार के लिए प्रचार किया और 2020 में दिल्ली विधान सभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का काम संभाला और पार्टी ने प्रचंड जीत हासिल की.लेकिन प्रशांत किशोर के इस प्यार और वार पर जेडीयू ने कुछ तीखा हमला किया. जेडीयू प्रवक्ता अजय आलोक ने प्रशांत किशोर को मानसिक रूप से विक्षिप्त बता दिया . अजय कहते हैं कि एक तरफ नीतीश जी को पिता समान कहते हैं और दूसरी तरफ उनकी कमियां गिनाते हैं     
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