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भारत की इन 5 झीलों को हिन्दू मानते हैं पवित्र, हर साल हजारों की संख्या में उमड़ते हैं श्रद्धालु

By मेघना वर्मा | Updated: March 10, 2018 10:26 IST

हिन्दू पुराणों में भी इन पांच पवित्र कुंड या सरोवर का जिक्र मिलता है। ये ना सिर्फ आस्था के गढ़ हैं बल्कि हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां आते हैं।

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हिन्दू मान्यताओं में लोग मंदिर और उससे जुड़ी हर एक चीज को पवित्र मानते हैं। नदी हो या सरोवर भारत के लोग भगवान से जुड़ी हर एक चीज को श्रद्धा के साथ पूजते हैं। देश में गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों के बारे में आपने सुना होगा, लेकिन आज हम आपको हिंदू मान्यताओं से जुड़ी कुछ झीलों के बारे में बताने जा रहे हैं। इन सभी झीलों या पवित्र सरोवरों का हिन्दुओं में विशेष महत्व है, लोग इन्हें पूजते हैं। प्राचीन काल से ही इन पांच पवित्र कुंड या सरोवर का महत्व है और हिन्दू पुराणों में इनका जिक्र भी मिलता है। ये ना सिर्फ आस्था के गढ़ हैं बल्कि हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां आते हैं। 

1. कैलाश मानसरोवर, चीन

चीन के अधीन इस झील को हिन्दू सभ्यता की सबसे पवित्र झील बताया जाता है। इसे देवताओं की झील भी कहते हैं। हिमालय के केंद्र में स्थित इस झील को भगवान शिव से जोड़ा जाता है। कहते हैं मानसरोवर के पास स्थित कैलाश पर्वत पर भगवान शिव आज भी वास करते हैं। यही कारण है कि हर साल हजारों की संख्या में लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए जाते हैं। लगभग 320 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई झील को सबसे शुद्ध पानी का स्रोत भी कहा जाता है। कैलाश पर स्थित इस मानसरोवर को टेथिस सागर का हिस्सा बताया जाता है जो हजारों साल पहले खत्म हो चुका था।  सालों से मौजूद मानसरोवर का पानी अब मीठा हो गया है। कहा जाता है कि माता पार्वती इसी सरोवर में स्नान किया करती थीं। सिर्फ हिन्दू मान्यताओं में ही नहीं, बौद्ध धर्म में भी इस सरोवर को पवित्र माना जाता है। 

2. नारायण सरोवर, गुजरात

जैसा कि नाम से ही सपष्ट होता है, नारायण सरोवर भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे 'भगवान विष्णु सरोवर' के नाम से भी जाना जाता है। गुजरात के कच्छ जिले के लखपत तहसील में स्थित इस पवित्र नदी का जिक्र श्रीमद्भागवत गीता में भी मिलता है। मान्यता है कि पवित्र नारायण तट के सरोवर पर आदि शंकराचार्य भी आये थे। इस सरोवर से 4 किलोमीटर की दूरी पर कोटेश्वर शिव मंदिर भी स्थित है। चीनी यात्री ह्वेनसांग की किताब 'सीयूकी' में भी इस झील का जिक्र मिलता है। नारायण सरोवर के पास कार्तिक पूर्णिमा से 3 दिन का भव्य मेला आयोजित किया जाता है। 

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3. पुष्कर सरोवर, राजस्थान

राजस्थान के अजमेर शहर से 14 किलोमीटर दूर पुष्कर झील को भी हिन्दू सभ्यता में सबसे पवित्र बताया जाता है। इस झील का संबंघ भगवान ब्रम्हा से किया जाता है। देश में यही एक जगह है जहां भगवान ब्रम्हा का एकमात्र मंदिर बना है। मान्यता है कि अप्सरा मेनका यहां के जल में स्नान किया करती थीं। महाभारत के अनुसार भगवान कृष्ण ने पुष्कर में ही तपस्या की थी। भगवान राम ने भी अपने पिता दशरथ का श्राद्ध पुष्कर में किया था। इसी जगह भगवान ब्रम्हा ने कार्तिक शुक्ल एकदशी से पूर्णमासी तक हवन किया था। इसी के चलते हर साल यहां कार्तिक के मेले का आयोजन किया जाता है।

4. पंपा सरोवर, मैसूर

मैसूर के पास स्थित पंपा सरोवर को ऐतिहासिक स्थल भी कहा जाता है। हंपी के निकट बसे हुए गांव अनेगुंदी को रामायण कालीन किश्किन्दा माना जाता है। तुंगभद्र नदी को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय मुख्य मार्ग से कुछ हटकर बाईं और पश्चिम पर यह पंपा सरोवर स्थित है। इसके आसपास कई मंदिर भी मौजूद हैं। 

5. बिंदु सरोवर, गुजरात

बिंदु सरोवर को भी देश के कुछ पवित्र सरोवरों में गिना जाता है। अहमदाबाद से 130 किलोमीटर उत्तर में अवस्थित ऐतिहासिक सिधपुर में स्थित इस बिंदु सरोवर का वर्णन ऋग्वेद में मिलता है। मान्यता ये भी है कि कपिल जी के पिता कर्माद ऋषि का आश्रम इसी स्थान पर था और यहां उन्होंने दस हाजार साल तक ताप किया था। महान ऋषि परशुराम ने भी अपनी माता का श्राद्ध यहां सिधपुर में बिंदु सरोवर के तट पर किया था। वर्तमान समय में गुजरात सरकार ने इस सरोवर का पूर्ण रूप से पुनरुधान कर दिया है। हर साल हजारों की संख्या में लोग यहां दर्शन करने आते हैं। 

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इसके अलावा भी हिन्दू सभ्यता में अमृत सरोवर, कपिल सरोवर, कुसुम सरोवर, नल सरोवर, कृष्ण सरोवर, राम सरोवर आदि को भी पवित्र माना जाता है।  

(फोटो- विकिपीडिया, फ्लिकर)

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