लाइव न्यूज़ :

गुजरात में गायब हो जाता है भगवान शिव का यह मंदिर!

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: December 20, 2017 13:43 IST

किंवदंती के मुताबिक सभी देवताओं ने मिलकर महिसागर संगम तीर्थ पर विश्वनंदक स्तंभ की स्थापना की जिसे स्तंभेश्वर तीर्थ के नाम से जाना जाता है।  

Open in App

देश में ऐसे कई मंदिर हैं जो अपने आप में अनोखे और रहस्यों से भरे हुए है जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। ऐसा ही एक मंदिर भगवान शिव का है जो रहस्यों से भरा हुआ है। भगवान शिव के मंदिर का एक और रहस्य आपके सामने पेश कर रहा हूं जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे। गुजरात का स्तंभेश्वर महादेव मंदिर जहां समुद्र देवता खुद शिव का जलाभिषेक करते हैं। इस मंदिर को 'गायब मंदिर' भी कहा जाता है। इसके लिए यह मंदिर दुनिया भर में जाना जाता है। यह मंदिर गुजरात के वड़ोदरा शहर से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी कवि कम्बोई गांव में स्थित है।

मंदिर के बारे में

इस तीर्थ स्थल का उल्लेख श्री महाशिवपुराण में किया गया है। इस मंदिर की खोज लगभग 200 साल पहले हुई थी। स्तंभेश्वर मंदिर गुजरात के प्राचीन तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर अरब सागर में खंभात की खाड़ी के किनारे स्थित है। मंदिर में स्थित शिवलिंग का आकार 4 फीट ऊंचा और दो फुट के व्यास वाला है। मंदिर दिन में गायब हो जाता है क्योंकि समुद्र में ज्वार भाटा आने के कारण समुद्र का पानी मंदिर तक पहुंच जाता है। पानी इतना बढ़ जाता है कि मंदिर डूब जाता है और दिखाई देना बंद हो जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। 

पौराणिक कथा

 पौराणिक कथा के अनुसार ताड़कासुर नाम के राक्षस ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न कर लिया। उसने शिव से वरदान मांगा कि मुझे केवल आपका पुत्र ही मार सकेगा वो भी छह दिन की आयु का। आखिरकार शिव के पुत्र कार्तिकेय ने 6 दिन की आयु में ताड़कासुर का वध किया। जब उसको मालूम चला कि ताड़का शिव का भक्त था तो उन्होंने विष्णु से कहा कि ताड़कासुर के वधस्थल पर शिवालय बनवा दें। उसके बाद सभी देवताओं ने मिलकर महिसागर संगम तीर्थ पर विश्वनंदक स्तंभ की स्थापना की जिसे स्तंभेश्वर तीर्थ के नाम से जाना जाता है।  

इस प्राचीन महादेव मंदिर की यात्रा के लिए पूरे एक दिन और रात का समय लगता है। यह होने वाले चमत्कारी दृश्य को देखने में बहुत अधिक समय लग जाता है। इस चमत्कारी दृश्य को देखने कर लिए लोग बहुत दूर-दूर से आते है। इस दृश्य को देखने मे कितना समय लगता है यह अनुमान कोई नही लगा सकता। जैसा कि भोर के समय ज्वार का प्रभाव कम होता है। उस दौरान मंदिर को देखा जा सकता है।

टॅग्स :भगवान शिवरहस्यमयी मंदिरहिंदू धर्म
Open in App

संबंधित खबरें

पूजा पाठVat Savitri Vrat 2026 Paran Time: जानिए 17 मई को कितने बजे तक कर सकेंगी पारण, क्या है शुभ समय

भारतMP हाई कोर्ट के फैसले के बाद धार भोजशाला में उमड़े श्रद्धालु, परिसर में गूंजी प्रार्थना; देखें वीडियो

भारतDhar Bhojshala Dispute: वाग्देवी मंदिर, हवन कुंड, मूर्तिकला और संस्कृत शिलालेख?, भोजशाला में सबूत और हिन्दू पक्ष ने जीत ली बाजी?

भारतPM मोदी, महापूजा और एयर शो... सोमनाथ से आईं शानदार तस्वीरें

भारतVIDEO: सोमनाथ अमृत महोत्सव में 'सूर्य किरण' टीम का एयर शो, दिखाए शानदार करतब

मुसाफ़िर अधिक खबरें

पूजा पाठPanchang 19 May 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 19 May 2026: रोजमर्रा के कामों में आ सकती हैं रुकावटें, जानें अपना भाग्यफल

पूजा पाठPanchang 18 May 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 18 May 2026: आज कर्क समेत 5 राशियों के लिए भाग्यशाली है दिन, नौकरी-व्यापार में प्राप्त होंगे नए अवसर

पूजा पाठपंच केदार तीर्थयात्राः रहिए तैयार, 18 मई को खुलेंगे श्री रुद्रनाथ मंदिर के कपाट, पवित्र डोली धार्मिक मंत्रोच्चार, पुष्प वर्षा और गढ़वाल राइफल्स सेना बैंड द्वारा बजाई गई धुनों के बीच रवाना