लाइव न्यूज़ :

यहां स्थित है माता सीता की रसोई, चूल्हे और चिमटे के साथ रखा है किचन का सामान

By मेघना वर्मा | Updated: November 9, 2019 11:11 IST

चित्रकूट के इन जंगलों में आज भी त्रेता युग के निशान दिखते हैं जिन्हें प्राकृतिक रूप से संजोया गया है। इसे भारत के कुछ प्रमुख तीर्थ स्थलों में भी जोड़ा जाता है। चित्रकूट के इस धाम में बारहों महीने श्रद्धालुओं का आवा-गमन लगा रहता है। 

Open in App
ठळक मुद्देलोगों में यह मान्यता है कि भगवान श्रीराम, देवी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण, चित्रकूट के घने जंगलों में वनवास के दौरान ठहरे थे। चित्रकूट में ही जमीन से लगभग सौ फुट की उंचाई पर भगवान हनुमान का भव्य मंदिर मौजूद है।

त्रेता युग के भगवान श्रीराम अपने त्याग और बलिदान के लिए आज भी याद किए जाते हैं। पिता का मान रखने के लिए अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 साल का वनवास भोगना, पत्नी सीता और अन्य बंधियों को दैत्य रावण के चंगुल से आजाद करना, ऐसे महान कार्यों के चलते आज भी दुनिया श्रीराम को याद करती है और उनका पूजन करती है। अपने वनवास में भगवान राम जिन जंगलों में रुके थे उन्हीं में से एक है उत्तर प्रदेश के मंदाकिनी नदी के किनारे बसा चित्रकूट धाम। चित्रकूट के इसी धाम में आज भी सीता माता की वो रसोई है जहां वह खाना बनाकर महर्षि ऋषियों को खिलाया करती थीं।

चित्रकूट के इन जंगलों में आज भी त्रेता युग के निशान दिखते हैं जिन्हें प्राकृतिक रूप से संजोया गया है। इसे भारत के कुछ प्रमुख तीर्थ स्थलों में भी जोड़ा जाता है। चित्रकूट के इस धाम में बारहों महीने श्रद्धालुओं का आवा-गमन लगा रहता है। 

यहीं मिले थे अपने भाई भरत से श्रीराम

लोगों में यह मान्यता है कि भगवान श्रीराम, देवी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण, चित्रकूट के घने जंगलों में वनवास के दौरान ठहरे थे। यहां सुंदर प्राकृतिक झरने, घने जंगल, चहकते पक्षी, बहती नदियां हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि कामद गिरि पर्वत की परिक्रमा करने से साड़ी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। यह एक भव्य धार्मिक स्थल हैं जहां पर भगवान राम रहा करते थे। इस स्थान पर भरत मिलाप मंदिर भी स्थित है, जहां  पर भरत ने श्रीराम से कहा था कि वे अयोध्या वापस लौट चलें। 

चित्रकूट में स्थित है भरत कूप और जानकी कुंड

प्रभु श्रीराम के भाई भरत ने इस स्थान पर पवित्र जल का कुंड बनाकर रखा था जहां परदेस के विभिन्न तीर्थस्थलों से पवित्र जल एकत्रित कर रखा जाता है। यह स्थान बहुत ही छोटा स्थल है जो कि इस नगर से कुछ दूरी पर स्थित है। यहां के रामघाट पर स्थित जानकी कुंड भी एक भव्य स्थान है। कहा जाता है कि सीताजी इस नदी में नहाया करती थीं। यहां की हरियाली भी दर्शनीय है। यह शांत और सुंदर स्थान वास्तव में कुदरत की अमूल्य देन है।

chitrkoot

हनुमान धारा की उंचाई में स्थित है सीता रसोई

चित्रकूट में ही जमीन से लगभग सौ फुट की उंचाई पर भगवान हनुमान का भव्य मंदिर मौजूद है। जिसे हनुमान धारा भी कहते हैं। हनुमान प्रतिमा के ठीक पीछे से साफ पानी की एक धारा लगातार बहती है जिस कारण से इसका नाम हनुमान धारा पड़ा है। वैज्ञानिक भी आज तक इस बात का पता नहीं लगा पाए हैं की आखिर ये पानी कहां से आता है। इसी मंदिर के ठीक पीछे माता सीता की रसोई मौजूद है। इस रसोई में मिट्टी के चूल्हे के साथ रसोई से जुड़ी कुछ पुरानी चीजें भी रखी हुई हैं। जिन्हें श्रद्धालु पूजते हैं। इस जगह पर वो स्थान भी है जहां मां सीता पंच ऋषियों को अपने हाथ से बना भोजन खिलाया करती थी। 

मंदिर में होती है लूट

श्रधा के नाम पर इस मंदिर में लूट मचती है। अगर आप पहली बार इस मंदिर में जा रहे हों तो सावधान रहें, यहां आपको हर कदम पर रोककर आप से भगवान को पैसा चढ़ाने के लिए कहा जाएगा। सिर्फ एक या दो जगहों पर नहीं बल्कि हनुमान धारा के रास्ते में भी पड़ने वाले हर एक मंदिर पर आपको चढ़ावा चढ़ाने को कहा जायेगा।      

टॅग्स :भगवान रामपूजा पाठसीता देवी
Open in App

संबंधित खबरें

पूजा पाठVat Savitri Vrat 2026 Paran Time: जानिए 17 मई को कितने बजे तक कर सकेंगी पारण, क्या है शुभ समय

पूजा पाठमर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी?, पूंछ को हिला नहीं पाए थे भीम?

पूजा पाठअहिरावण वध के लिए हनुमान जी ने धारण किया था पंचमुखी स्वरूप?, श्रीराम-लक्ष्मण को कैद से मुक्त कराया, जानें कहानी

पूजा पाठकैसे करें हनुमान बाहुक का पाठ?, मंगलवार-शनिवार को शुरू कर पाठ?, देखिए वीडियो

पूजा पाठHanuman Janmotsav 2026: रूद्र के अवतार हनुमान जी को अमरता का वरदान?, मंगलवार को जरूर करें बजरंग बाण?, वीडियो

मुसाफ़िर अधिक खबरें

पूजा पाठGuru Gochar: 2 जून से 5 माह तक इन 3 राशि वालों का गोल्डन पीरियड, भाग्य में वृद्धि, धन वर्षा के संकेत

पूजा पाठPanchang 19 May 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 19 May 2026: रोजमर्रा के कामों में आ सकती हैं रुकावटें, जानें अपना भाग्यफल

पूजा पाठPanchang 18 May 2026: आज कब से कब तक है राहुकाल और अभिजीत मुहूर्त का समय, देखें पंचांग

पूजा पाठRashifal 18 May 2026: आज कर्क समेत 5 राशियों के लिए भाग्यशाली है दिन, नौकरी-व्यापार में प्राप्त होंगे नए अवसर