हिन्दू पंचांग के अनुसार एक साल में कुल 24 एकादशियां पड़ती हैं। सभी एकादशियों में भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण निर्जला एकादशी का व्रत है। इसके करने से सभी एकादशियों का फल साधक को मिलता है। ऐसी भी मान्यता है कि निर्जला एकादशी को महाभारत काल में पांडु पुत्र भीम ने किया था। इसलिए इसे भीम एकादशी भी कहते हैं। Read More
निर्जला एकादशी के दिन साधक पूरे मन से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। वे भगवान को तुलसी के पत्ते, फूल, फल और मिठाई आदि चढ़ाते हैं। आप पास के किसी मंदिर भी जा सकते हैं। ...
निर्जला एकादशी व्रत सबसे कठोर व्रतों में एक है। इस दिन साधक पानी का एक बूंद भी ग्रहण नहीं करता। वैसे, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ दूसरे लोगों को पानी पिलाने का विशेष महत्व है। ...
निर्जला एकादशी व्रत को सबसे कठिन व्रतों में शामिल किया जाता है। कई ऐसी बातें हैं, जिसका साधक को इस व्रत को करने के समय विशेष ध्यान रखना चाहिए। जानिए, इस दिन क्या नहीं करें... ...
निर्जला एकादशी का व्रत रखने वाला व्यक्ति इस दिन अगर किसी दूसरे को पानी पिलाता है तो यह सबसे बड़े पुण्य का काम है। वैसे भी हिंदू मान्यताओं में पानी पिलाना सबसे बड़े पुण्य का काम है। ...
शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ मास में भगवान हनुमान की अराधना करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं। मंगल दोष हो तो ज्येष्ठ के महीने में मन से हनुमान जी के नाम का व्रत एवं पूजन करें। ...