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ट्विटर ने बताए, Section 377 पर कुछ घंटो में इतने हजार ट्वीट, समलैंगिकता पर मिले ऐसे-ऐसे रिएक्शन

By जोयिता भट्टाचार्या | Updated: September 6, 2018 17:59 IST

सोशल मीडिया पर धारा 377 पर आने वाले फैसले का लोगों ने स्वागत किया। इस फैसले के आने के पहले से ही माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर सेक्शन 377 और एलजीबीटीक्यू को लेकर काफी चर्चाएं चल रही थी।

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ठळक मुद्देसोशल मीडिया पर धारा 377 पर आने वाले फैसले का लोगों ने स्वागत कियापिछले 12 घंटो से करीब 30,000 ट्वीट्स में डिस्कशन हो रहा है

नई दिल्ली, 6 सितंबर: देश के सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को देश में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आईपीसी की धारा 377 के उस प्रावधान को खत्म कर दिया। कोर्ट ने कहा है कि भारत में दो वयस्कों के बीच समलैंगिक संबंध बनाना अब अपराध नहीं है। इस फैसले के बाद से पूरे देश में अलग-अलग तरह से इस फैसले का स्वागत किया गया। इस फैसले की खुशी सोशल मीडिया पर भी देखने को मिली। अलग-अलग तबके के लोगों ने सोशल मीडिया में इस फैसले को लेकर अपने रिएक्शन दिए। सोशल मीडिया पर धारा 377 पर आने वाले फैसले का लोगों ने स्वागत किया। इस फैसले के आने के पहले से ही माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर सेक्शन 377 और एलजीबीटीक्यू को लेकर काफी चर्चाएं चल रही थी।

सोशल मीडिया Twitter ने गुरुवार को फैसला आने के बाद ट्वीट कर जानकारी दी, 'पिछले 12 घंटो से #section377 और #LGBTQ को लेकर करीब 30,000 ट्वीट्स में डिस्कशन हो रहा है। यह विचार-विमर्श अभी भी जारी है। #LGBTQ कम्युनिटी को बधाई!! प्यार की जीत हुई।' इसके साथ ही ट्वीट में तिरंगे के साथ हैशटैग LoveWins का इस्तेमाल भी किया गया। ट्विटर पर गुरुवार को ट्रेंड होने वाले टॉप 10 ट्रेंड्स में अधिकतर इस फैसले से जुड़े ही थे। ट्विटर पर Section 377, Supreme Court, #377Verdict, #LGBT, #LoveisLove, #Sec377 टॉप ट्रेंड में शामिल थे।

वही दूसरी ओर कुछ लोगों ने ट्ववीटर पर इस फैसला का खूब मजाक भी बनाया। लोगों अलग-अलग तरह से मिम बनाकर अपने रिएक्शन दे रहे हैं। आइए देखते हैं ट्विटर पर लोग किस तरह से इस विषय पर कर रहे हैं बातें...

क्या है धारा 377

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के मुताबिक सेम सेक्स के व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाना अप्राकृतिक है। अगर कोई व्यक्ति अप्राकृतिक रूप से यौन संबंध बनाता है तो उसे उम्रकैद हो सकती है या फिर जुर्माने के साथ अधिकतम दस साल की जेल हो सकती है। और इसमें जमानत भी नहीं मिलती है। साथ ही इसमें आरोपी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए किसी भी वारंट की जरूरत नहीं पड़ती है।

टॅग्स :आईपीसी धारा-377ट्विटरसुप्रीम कोर्टएलजीबीटीसमलैंगिक
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