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Shardiya Navratri 2021: 7 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू, जानें कलश स्थापना विधि, शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री लिस्ट

By रुस्तम राणा | Updated: October 5, 2021 08:29 IST

हिन्दू पंचांग के अनुसार, घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 07 अक्टूबर को सुबह 06:17 बजे से लेकर 07:07 बजे के बीच रहेगा। घटस्थापना में कलश स्थापना विधिनुसार की जाती है।

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ठळक मुद्देदुर्गाष्टमी 13 अक्टूबर को है और महानवमी 14 अक्टूबर को है।प्रति वर्ष शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होती है।

Shardiya Navratri 2021: शारदीय नवरात्रि पर्व  7 अक्टूबर गुरूवार से प्रारंभ हो रहा है, जिसका समापन 15 अक्टूबर को होगा। दुर्गाष्टमी 13 अक्टूबर को है और महानवमी 14 अक्टूबर को है। वहीं 15 अक्टूबर को दशहरा पर्व है। शारदीय नवरात्रि हिन्दू धर्म का पावन पर्व है। इस पर्व में मां शक्ति दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रति वर्ष शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होती है और इसका समापन नवमी तिथि को होता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में मां दुर्गा के भक्त उनकी व्रत रखकर विधि-विधान से उपासना करते हैं। जहां शुभ मुहूर्त में घटस्थापना कर इस पावन पर्व की शुरूआत की जाती है। वहीं अंतिम कन्या पूजन कर इस पर्व का समापन किया जाता है। दशमी तिथि के दिन विजयादशमी उत्सव मनाया जाता है।

घटस्थापना का मुहूर्त

हिन्दू पंचांग के अनुसार, घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 07 अक्टूबर को सुबह 06:17 बजे से लेकर 07:07 बजे के बीच रहेगा। घटस्थापना में कलश स्थापना विधिनुसार की जाती है।

कलश स्थापना विधि

सबसे पहले घर में उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा स्थल का चयन करें। उसे पोछा लगाकर गंगाजल से साफ-सुथरा करें। इसके बाद मां की चौकी बिछाएं। इस पर लाल कपड़ा बिछाकर मां की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद कलश स्थापना करें। नारियल में चुनरी लपेट दें और कलश के मुख पर मौली बांधें। कलश में जल भरकर लौंग का जोड़ा, सुपारी, हल्दी की गांठ, दूर्वा और एक रूपये का सिक्का डालें। अब कलश के मुख पर पांच आम के पत्ते लगाकर उस पर नारियल रखें। इस कलश को मां की प्रतिमा के ठीक दायीं ओर स्थापित करें। इस प्रक्रिया के बाद मंत्र सहित मां दुर्गा का आवाह्न करें।    

नवरात्रि पूजा सामाग्री

मां दुर्गा की प्रतिमा या फोटो, चौकी, लाल कपड़ा, पानी वाला जटायुक्त नारियल, बंदनवार आम के पत्तों का, पुष्प, दूर्वा, सुपारी साबुत, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, पांच मेवा, जौ, घी, लोबान, गुग्गुल, लौंग, कमल गट्टा, सुपारी, कपूर. और हवन कुंड, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, दीपक, दीपबत्ती, नैवेद्य, शहद, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, लाल रंग की गोटेदार चुनरी, आम के पत्‍ते, लंबी बत्ती के लिए रुई या बत्ती, धूप, अगरबत्ती, माचिस, कलश, साफ चावल, कुमकुम, 16 श्रृंगार का सामान, दीपक, पुष्प माला, पान, सुपारी, लाल झंडा, लौंग, इलायची, बताशे या मिसरी, कपूर, उपले, फल व मिठाई, दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती व आरती की किताब, मेवे, हवन के लिए आम की लकड़ी आदि। शारदीय नवरात्रि का महत्व

हिन्दू मान्यता के अनुसार शारदीय नवरात्रि माता दुर्गा की आराधना का श्रेष्ठ समय होता है। नवरात्रि के 9 दिनों में हर दिन मां के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है, जो अपने भक्तों का कल्याण करती हैं। नवरात्रि का हर दिन देवी के विशिष्ठ रूप को समर्पित होता है और हर देवी स्वरुप की कृपा से अलग-अलग तरह के मनोरथ पूर्ण होते हैं। कहते हैं जो भक्त सच्चे मन से शारदीय नवरात्रि व्रत को करता है मां दुर्गा उसके समस्त प्रकार के कष्टों को हर लेती हैं और उसे सुखी और समृद्धशाली जीवन प्रदान करती हैं। इस व्रत से भक्तों की समस्त प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।

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