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Navratri 2019: दुर्गा पूजा कब से है, क्या है कलश स्थापना की विधि, शुभ मुहूर्त और पूजा का समय, जानें

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: September 11, 2019 11:30 IST

Shardiya Navratri 2019 Date: इस बार नवरात्र पर कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6.16 बजे से 7.40 बजे (सुबह) के बीच है। इसके अलावा दोपहर में 11.48 बजे से 12.35 के बीच अभिजीत मुहूर्त भी है।

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ठळक मुद्देशारदीय नवरात्र की शुरुआत इस बार 29 सितंबर से हो रही हैनवरात्र में नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की होती है पूजानवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का है विशेष महत्व, इसके बाद ही शुरू करें पूजा

Navratri 2019: हिंदू धर्म में नवरात्र का बहुत महत्व है। 9 से 10 दिनों तक चलने वाले इस त्योहार में शक्ति की देवी मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। साल में 4 नवरात्र पड़ते हैं लेकिन इनमें सबसे अधिक मान्यता चैत्र और शारदीय नवरात्र की है। चैत्र नवरात्र चैत्र महीने में जबकि शारदीय नवरात्र अश्विन मास में पड़ता है। इसके अलावा आषाढ़ और पौष माह में भी गुप्त नवरात्र पड़ते हैं। 

Navratri 2019: नवरात्र कब से होगा शुरू

नवरात्र का त्योहार मुख्यत: भारत के उत्तरी राज्यों में मनाया जाता है। इन दिनों में भक्त उपवास रखते हैं और देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं। साथ ही इन दिनों घरों में मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन आदि चीजों का परहेज किया जाता है। इस बार शारदीय नवरात्र 29 सितंबर से शुरू हो रहा है। नवरात्र में नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि की पूजा की जाती है। नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है। साथ ही कई भक्त इन नौ दिन उपवास या फलाहार करते हैं। कन्या पूजन के पश्चात उपवास खोला जाता है।

Navratri 2019: कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 

इस बार नवरात्र पर कलश स्थापना की बात करें तो इसका शुभ मुहूर्त सुबह 6.16 बजे से 7.40 बजे (सुबह) के बीच है। इसके अलावा दोपहर में 11.48 बजे से 12.35 के बीच अभिजीत मुहूर्त भी है जिसके बीच आप कलश स्थापना कर सकते हैं। बता दें कि अश्विन की प्रतिपदा तिथि 28 सितंबर को रात 11.56 से ही शुरू हो रही है और यह अगले दिन यानी 29 सितंबर को रात 8.14 बजे खत्म होगी।

Navratri 2019: कलश स्थापना की विधि

इस दिन तड़के उठकर घर की साफ-सफाई करनी चाहिए। इसके बाद स्नान आदि कर साफ-सुथरे कपड़े पहने और फिर कलश स्थापना की तैयारी करें। सबसे पहले पूजा का संकल्प लें। संकल्प लेने के बाद मिट्टी की वेदी बनाकर उसपर जौ को बोया जाता है और फिर कलश की स्थापना की जाती है। कलश में गंगा जल रखें के ऊपर कुल देवी की प्रतिमा या फिर लाल कपड़े में लिपटे नारियल को रखें और पूजन करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें। साथ ही यह भी ध्यान रखें कलश की जगह पर नौ दिन तक अखंड दीप जलता रहे।

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