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16 से आरम्भ हुआ मलमास, 13 जून तक इन तीन उपायों से पाएं भगवान विष्णु की कृपा

By गुलनीत कौर | Updated: May 17, 2018 10:45 IST

मलमास के पूरे माह में यदि संभव हो तो रोजाना सुबह गाय के घी का तिलक लगाएं।

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16 मई से मलमास यानी अधिमास लग चुका है जो कि अगले महीने की तारीख 13 जून तक चलेगा। शास्त्रों के अनुसार यह एक अशुभ महीना होता है जिसके दौरान सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लगा दी जाती है। 15 मई को भौमवती अमावस्या के अगले दिन से मलमास लग गया। ज्योतिर्विद पं दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के अनुसार  इस अधिमास के दौरान कुछ कार्यों को करने से सख्त बचना चाहिए। जैसे कि मांगलिक और शुभ कार्यों पर विराम लगाएं। शादी-ब्याह, गृहप्रवेश, नए बिज़नेस की शुरुआत, आदि काम 13 जून तक टाल दें। 

शास्त्रों में अधिमास या मलमास को भगवान पुरुषोत्तम का महीना भी कहते हैं। इस पूरे माह में भगवान विष्णु की अराधना करने से कृपा बनी रहती है। विष्णु के अलावा यह महीने भगवान शिव की अराधना के लिए भी सर्वोत्तम माना गया है। किन्तु पूजा के अलावा शास्त्रों में दर्ज यदि विशेष उपाय भी किए जाएं तो देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। आइए जानते हैं मलमास में किए जाने वाले 3 उपायों के बारे में: 

1. पीली वस्तुओं का दान: शास्त्रों के अनुसार मलमास सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की अराधना करने का महीना है। भगवान विष्णु को पीतांबरधारी यानी पीले वस्त्र धारण करने वाले देवता भी कहा जाता है। इसलिए मान्यतानुसार इस महीने में पीले वस्त्र, अनाज, पीली वस्तुएं दान करना शुभ माना गया है। पीले रंग की किसी भी चीज को पहले भगवान विष्णु और फिर उसके बाद गरीबों में दान करने से भगवान विष्णु की कृपा भक्त पर बनी रहती है।

यह भी पढ़ें: मलमास में भूल से भी ना करें ये काम, इस मंत्र के जाप से होगी कृपा

2. गाय के घी का तिलक: मलमास के पूरे माह में यदि संभव हो तो रोजाना सुबह गाय के घी का तिलक लगाएं। ऊं वासुदेवाय नम: मंत्र का एक माला जाप करें और फिर माथे पर गाय के शुद्ध घी का तिलक लगाएं। ऐसा करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है और घर-परिवार में भी खुशियां आती हैं। 

3. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: मलमास के महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने का महत्व है। यदि संभव हो तो इस पूरे महीने में रोजाना सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। लेकिन ऐसा संभव ना हो तो ब्रह्म मुहूर्त में साधारण जल में थोड़ा गंगा जल मिलाकर स्नान कर लें। ऐसा करने से भी प्रभु कृपा प्राप्त होती है। 

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