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बलबीर सिंह सीनियर अगर जीवित होते तो खुशी से उछल पड़ते: बेटी सुशबीर

By भाषा | Updated: August 5, 2021 18:59 IST

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चंडीगढ़, पांच अगस्त अपना पूरा जीवन हॉकी को समर्पित करने वाले महान खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर की बेटी सुशबीर कौर ने गुरुवार को कहा कि अगर उनके पिता तोक्यो ओलंपिक में राष्ट्रीय टीम की ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने वाली उपलब्धि को देखने के लिए जीवित होते तो खुशी से उछल पड़ते।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने गुरुवार को यहां कांस्य पदक के प्ले-ऑफ मैच में जर्मनी को 5-4 से हराकर 41 साल बाद ओलंपिक पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

सुशबीर ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘ वह बहुत खुश होते। वह खुशी से उछल पड़ते।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ जब हमारा परिवार टीवी पर मैच देख रहा था, तो मैंने मुड़कर उस कुर्सी की तरफ देखा जहां वह हमारे साथ बैठते थे और भारतीय हॉकी टीम से जुड़े हर मैच को देखते थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ वह उत्सुकता से खेल देखते था और रोमांचक क्षणों का आनंद लेते थे। उन्होंने अपना जीवन हॉकी के लिए जिया। उनके लिए राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा ही उनका जीवन था।’’

बलबीर सिंह सीनियर भारत के महान हॉकी खिलाड़ियों में से एक है, जिन्होंने अपने शानदार करियर में तीन ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते थे। मई 2020 में 96 वर्ष की आयु में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझने के बाद उनका निधन हो गया था।

भारतीय पुरुष टीम ने कांस्य पदक जीता वही महिला टीम शुक्रवार को कांस्य पदक प्ले ऑफ मैच खेलेगी।

सुशबीर ने कहा, ‘‘ यह भारतीय हॉकी के लिए एक नया अध्याय है। इससे उभरती हुई प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। अगर इस ओलंपिक में हमारा प्रदर्शन अच्छा नहीं होता तो उसे बड़ा झटका लगता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ अगर हॉकी को लोकप्रियता मिली तो यह प्रायोजकों को आकर्षित करेगा जिससे इस खेल को और मदद मिलेगी।’’

उन्होंने बताया कि उनके पिता समय-समय पर जूनियर प्रतिभाओं सहित भारतीय हॉकी टीम के सदस्यों का मार्गदर्शन करते रहते थे।

उन्होंने कहा, ‘‘ जब भी वह उभरती प्रतिभाओं से मिलते थे, वह उन्हें कड़ी मेहनत करने और मैच जीतने के लिए कहते थे, जिससे उन्हें सम्मान मिलेगा। वह खिलाड़ियों को बड़े सपने देखने, बड़ा लक्ष्य रखने और कड़ी मेहनत करने के साथ सकारात्मक सोच रखने की सलाह देते थे।’’

कांस्य पदक प्लेऑफ में भारत की रोमांचक जीत के कई सूत्रधार रहे जिनमें दो गोल करने वाले सिमरनजीत सिंह (17वें मिनट और 34वें मिनट)  हार्दिक सिंह (27वां मिनट), हरमनप्रीत सिंह (29वां मिनट) और रूपिंदर पाल सिंह (31वां मिनट) तो थे ही लेकिन आखिरी पलों में पेनल्टी बचाने वाले गोलकीपर श्रीजेश भी इनमें शामिल हैं ।

सुशबीर ने काफी वर्ष पहले उस मौके को भी याद किया जब बलबीर सिंह सीनियर ने हरमनप्रीत से मुलाकात की थी और उनकी तारीफ की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘ उस समय हरमनप्रीत एक नंबर लिखी हुई जर्सी पहनते थे और हमने मजाक में उनसे कहा कि बलबीर जी 13 नंबर की जर्सी पहनते थे और देखो उन्होंने रिकॉर्ड बनाया। अब तो हरमनप्रीत भी 13 नंबर की जर्सी पहनते हैं।’’

बलबीर सिंह सीनियर आधुनिक ओलंपिक के उन 16 महान खिलाड़ियों में इकलौते भारतीय है जिसका चयन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने किया था।

बलबीर सिंह सीनियर के नाम ओलंपिक फाइनल में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड भी है। उन्होंने 1952 में हेलसिंकी खेलों में नीदरलैंड पर भारत की 6-1 की जीत में पांच गोल दागे थे।

वह 1975 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के मैनेजर थे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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