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उत्तर प्रदेश में अग्रिम जमानत संबंधी विधेयक को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी

By भाषा | Updated: July 22, 2019 16:53 IST

राज्य सूचना आयोग ने भी 2009 में इस संशोधित विधेयक को लाने की अनुशंसा की थी। फिर 2010 में मायावती की तत्कालीन सरकार ने इस संबंध में एक विधेयक को मंजूरी दी थी और स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के पास भेज दिया था।

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ठळक मुद्देउत्तर प्रदेश और उतराखंड को छोड़ कर देश के अन्य सभी राज्यों में अग्रिम जमानत का प्रावधान है।नये विधेयक को मंजूरी दिए जाने से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने पूर्व की खामियों एवं अन्य राज्यों में प्रावधान के प्रयोग पर अध्ययन करने के लिए एक समिति गठित की।

 राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उत्तर प्रदेश के एक महत्त्वपूर्ण विधेयक को स्वीकृति दी है जिससे अग्रिम जमानत के प्रावधान को फिर से शामिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा। इस प्रावधान को 1976 में आपातकाल के दौरान हटा दिया गया था। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश और उतराखंड को छोड़ कर देश के अन्य सभी राज्यों में अग्रिम जमानत का प्रावधान है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “राष्ट्रपति ने दंड प्रक्रिया संहिता (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2018 को मंजूरी दे दी है।” यह विधेयक उत्तर प्रदेश के लिये दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 438 में संशोधन का प्रावधान करता है।

संशोधन के मुताबिक अग्रिम जमानत पर सुनवाई के दौरान आरोपी का मौजूद रहना जरूरी नहीं होगा। साथ ही इसमें अग्रिम जमानत देने पर विचार करने से पहले अदालत द्वारा कुछ अनिवार्य शर्तें लगाए जाने का भी प्रावधान है। उदाहरण के लिए गंभीर अपराधों के मामले में अग्रिम जमानत नहीं दी जाएगी। अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा उन मामलों में भी अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी जिनमें सजा फांसी की हो। साथ ही गैंगस्टर कानून के तहत आने वाले मामलों में भी अग्रिम जमानत नहीं दी जाएगी।

राज्य सूचना आयोग ने भी 2009 में इस संशोधित विधेयक को लाने की अनुशंसा की थी। फिर 2010 में मायावती की तत्कालीन सरकार ने इस संबंध में एक विधेयक को मंजूरी दी थी और स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के पास भेज दिया था। हालांकि, यह विचार के लिए रख दिया गया। बाद में कुछ बदलावों के सुझावों के साथ इसे वापस भेजा गया।

नये विधेयक को मंजूरी दिए जाने से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने पूर्व की खामियों एवं अन्य राज्यों में प्रावधान के प्रयोग पर अध्ययन करने के लिए एक समिति गठित की। इसकी अध्यक्षता प्रधान सचिव (गृह) ने की और इसमें महानिदेशक (अभियोजन) और कानून विभाग के अधिकारी भी शामिल थे। दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत के लिए किसी तरह की शर्त लगाना अदालत के विवेक पर छोड़ा गया है।

हालांकि, उत्तर प्रदेश संशोधन विधेयक में पहले से ही कुछ शर्तें लगाई गई हैं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इन शर्तों में शामिल है कि आरोपी को जब कभी पुलिस पूछताछ के लिए बुलाएगी, तो उसे पेश होना होगा।

आरोपी मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से डरा-धमका नहीं सकता और आरोपी अदालत की इजाजत के बिना देश नहीं छोड़ सकता। अन्य संशोधन है कि अदालत को 30 दिनों के भीतर अग्रिम जमानत पर दिए गए आवेदन पर फैसला देना होगा। अधिकारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में ऐसा प्रावधान है। 

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