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भारत में 1 लाख से अधिक स्कूलों में केवल एक शिक्षक, 11 लाख से अधिक शिक्षकों के पद खाली: यूनेस्को रिपोर्ट

By विनीत कुमार | Updated: October 6, 2021 09:52 IST

यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में अंडर क्वालिफाइड शिक्षकों की संख्या ज्यादा है। वहीं, केवल एक शिक्षक के भरोसे सबसे ज्यादा स्कूल मध्य प्रदेश में है।

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ठळक मुद्देभारत मे एक शिक्षक के भरोसे 1.1 लाख के करीब स्कूल मौजूद हैं: यूनेस्कोभारत में स्कूलों में कुल 11.16 लाख शिक्षण पद रिक्त भी हैं, इनमें से 69% ग्रामीण क्षेत्रों में हैं।

नई दिल्ली: भारत में करीब 1.1 लाख स्कूल ऐसे हैं जहां एक केवल एक शिक्षक उपलब्ध हैं। यूनेस्को की '2021 स्टेट ऑफ द एजुकेशन रिपोर्ट फॉर इंडिया: नो टीचर्स, नो क्लास’ रिपोर्ट में ये बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में स्कूलों में कुल 19% या 11.16 लाख शिक्षण पद रिक्त हैं। इनमें से 69% ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। 

तीन राज्यों में शिक्षकों की एक लाख से अधिक वैकेंसी

यूनेस्को की रिपोर्ट के मुताबिक देश में तीन राज्यों में शिक्षकों के एक लाख से अधिक पद खाली है। इसमें सबसे ऊपर उत्तर प्रदेश है जहां 3.3 लाख वैकेंसी उपलब्ध है। इसके अलावा बिहार में 2.2 लाख और पश्चिम बंगाल में 1.1 लाख शिक्षक के पद खाली हैं। 

वहीं, मध्य प्रदेश में एक शिक्षक वाले स्कूल की संख्या सबसे अधिक (21077) है। अधिकांश रिक्तियां ग्रामीण स्कूलों में हैं। बिहार के मामले में जहां 2.2 लाख शिक्षकों की आवश्यकता है, 89% रिक्तियां गांवों में हैं। इसी तरह यूपी में खाली पड़े 3.2 लाख पदों में से 80 फीसदी ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में हैं। पश्चिम बंगाल में यह आंकड़ा 69% है।

शिक्षकों की योग्यता भी सवालों के घेरे में

शिक्षकों की योग्यता पर यूनेस्को की रिपोर्ट कहती है कि बिहार में लगभग 16% प्रीप्राइमरी, 8% प्राथमिक, 13% उच्च प्राथमिक, 3% माध्यमिक और 1% उच्च माध्यमिक शिक्षकों की योग्यता कमतर है। उच्च माध्यमिक स्तर पर सभी अयोग्य शिक्षकों में से लगभग 60% निजी (मान्यता प्राप्त) स्कूलों में हैं, जबकि 24% शिक्षा विभाग द्वारा संचालित स्कूलों में हैं।

पूरे देश की बात करें तो 7.7 प्रतिशत प्री-प्राइमरी, 4.6 प्रतिशत प्राइमरी, 3.3 प्रतिशत अपर-प्राइमरी और 0.8 प्रतिशत सेकेंडरी शिक्षकों की योग्यता जरूरत के मुताबिक नहीं है।

यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार माध्यमिक स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों के अनुपात में काफी अंतर है। वहीं, स्पेशल एजुकेशन, म्यूजिक, आर्ट्स और फिजिकल एजुकेशन टीचर्स की उपलब्धता के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं है। 

टॅग्स :UNESCO
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