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उद्धव ठाकरे का चुनाव आयोग पर सीधा हमला, बोले- "ये फर्जी है, इसे चूना चुनाव आयोग कहना चाहिए"

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: February 28, 2023 11:04 IST

उद्धव ठाकरे ने संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव आयोग को “चूना चुनाव आयोग” कहा जाना चाहिए। इसने हमारा भरोसा खो दिया है।

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ठळक मुद्देशिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे का चुनाव आयोग पर तीखा हमला ठाकरे ने कहा चुनाव आयोग को “चूना चुनाव आयोग” कहना चाहिए, इसने भरोसा खो दिया हैआयोग को पार्टी पर फैसला नहीं देना चाहिए था क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है

मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे ने संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। महाविकास अघाड़ी सरकार की अगुवाई कर चुके पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विवादित बयान देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को “चूना चुनाव आयोग” कहा जाना चाहिए।

बीते सोमवार को मराठी भाषा दिवस के अवसर पर पार्टी की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ठाकरे ने कहा, “चुनाव आयोग फर्जी है। इसकी न तो कोई साथ बची और न ही विश्वसनीयता। इसलिए इसे ‘चूना चुनाव आयोग’ कहना चाहिए। इसमें हमारा भरोसा खो दिया है।”

उन्होंने कहा कि शिवसेना प्रकरण में चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग को पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना फैसला नहीं देना चाहिए था क्योंकि उससे संबंधित केस की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही थी।

उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना विवाद की तरह चुनाव आयोग ने लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन के बाद उनके बेटे चिराग पासवान और उनके भाई पशुपति कुमार पारस के बीच हुए झगड़े के बीच लोक जनशक्ति पार्टी के दोनों गुटों को शिवसेना की तरह की एक-एक सिंबल दे दिया था। हालांकि पासवान की पार्टी के दोनों गुट उस पर खामोश रहे क्योंकि दोनों सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के साथ बने रहना चाहते हैं।

ठाकरे ने चुनाव आयोग के साथ-साथ सूबे के मौजूदा मु्ख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी आक्रामक हमला किया और कहा जिनके पास अपने मूल्य नहीं हैं वे अक्सर चोरी का सहारा लेते हैं।

वहीं उद्धव के आरोपों के इतर बीते दिनों चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला पार्टी गुट को असली शिवसेना बताते हुए उसे ‘तीर-धनुष’ का चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया था। हालांकि आयोग द्वारा शिंदे समूह को असली शिवसेना के रूप में मान्यता देने के बाद भी पार्टी की संपत्तियों के बंटवारे को लेकर तमाम तरह के संघर्ष दोनों ओर से चल रहे हैं और भी यह मुद्दा बेहद पेचिदा बना हुआ है।

मालूम हो कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बीते साल जून में उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत करके पार्टी में बड़ी संख्या में विधायकों को तोड़कर शिवसेना का विभाजित किया था और तत्कालीन महाविकास अघाड़ी सरकार को गिरा दिया था। वह सरकार उद्धव की अगुवाई में चल रही थी, जिसे शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस का समर्थन था।

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