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ढाबा मालिक के साथ फर्जी मुठभेड़ के आरोपी मुख्य आरक्षी समेत दो गिरफ्तार

By भाषा | Updated: March 26, 2021 20:14 IST

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एटा (उप्र) 26 मार्च एटा जिले की कोतवाली देहात पुलिस ने ढाबा संचालक को फर्जी मुठभेड़ में कथित रूप से फंसाने के मामले में शुक्रवार को प्रमुख आरोपी एवं पुलिसकर्मी शैलेंद्र यादव व शराब माफिया बंटू यादव को एटा-आगरा मार्ग पर स्थित एक कॉलेज के सामने से गिरफ्तार किया।

प्रभारी निरीक्षक कोतवाली (देहात) प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि आज दोपहर 12 बजे मुखबिर की सूचना पर फर्जी मुठभेड़ कांड के मुख्य आरोपी व कोतवाली देहात में तैनात मुख्य आरक्षी शैलेंद्र यादव व शराब माफिया बंटू यादव को जेड एच डिग्री कॉलेज के सामने से गिरफ्तार कर लिया गया है।

उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी के बाद दोनों का जिला चिकित्सालय एटा में चिकित्सकीय परीक्षण कराके मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया जहां से दोनों को जेल भेजा गया है।

घटना की जांच कर रहे क्षेत्राधिकारी अतरौली स्वदेश गुप्ता ने बताया कि दोनों आरोपियों को शीघ्र ही हिरासत में लेकर पूछताछ की जाएगी।

उन्होंने बताया कि तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक इंन्देश पाल व संतोष को भी शीघ्र गिरफ्तार कर जेल भेजा जायेगा। दर्ज मुकदमे की जांच अलीगढ़ अपराध शाखा के निरीक्षक प्रवेन्द्र कुमार कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने पुलिसकर्मियों से खाने के पैसे मांगने पर एक ढाबे के मालिक सहित 10 लोगों को कथित रूप से फंसाने के मामले में एक मुख्य आरक्षी और अन्य अनाम व्यक्तियों के खिलाफ मंगलवार को यहां एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

प्राथमिकी में मुख्य आरक्षी शैलेंद्र और अन्य के खिलाफ 10 लोगों को फंसाने का आरोप लगाया गया है।

पुलिस ने मंगलवार को धारा-383 (जबरन वसूली) और 211 (अपराध का झूठा आरोप) समेत सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज किया था।

इसके पहले अपर पुलिस अधीक्षक (अपराध) राहुल कुमार ने बताया था कि पुष्पेंद्र के छोटे भाई प्रवीण द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में यह आरोप लगाया गया था कि कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक इंद्रेश पाल सिंह और दो मुख्य आरक्षी शैलेन्द्र और संतोष कुमार ने उनके सहित 10 लोगों को फंसा कर झूठे मामले दर्ज किए हैं।

एएसपी कुमार ने कहा था कि पुलिसकर्मियों ने स्थानीय शराब गिरोह के सरगना बंटू यादव की मदद ली, जिसने कथित तौर पर पुलिस कर्मियों को अवैध शराब और 'गांजा' मुहैया कराया गया था।

कोतवाली देहात पुलिस ने पहले दावा किया था कि उन्होंने चार फरवरी की शाम को जसराम गांव में ढाबे पर कुछ लोगों द्वारा डकैती की योजना बनाए जाने की सूचना मिलने पर छापेमारी की कार्रवाई की थी और देसी पिस्तौल और शराब बरामद करने के बाद ढाबे से 10 लोगों को गिरफ्तार किया था।

मामला फर्जी होने की जानकारी मिलने के बाद आगरा जोन के अपर पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा था कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप बहुत गंभीर थे और उन्होंने मामले में शामिल पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित करने और कानूनी कार्रवाई करने के आदेश दिये थे।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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