नयी दिल्ली, 19 नवंबर उच्चतम न्यायालय ने एक कारण बताओ नोटिस पर राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा की गई माफी की पेशकश खारिज कर दी है।
शीर्ष न्यायालय ने बार एसोसिएशन को जारी नोटिस में कहा था कि नारेबाजी करने और अदालत कक्ष का दरवाजा बंद करने को लेकर उसके पदाधिकारियों के खिलाफ क्यों नहीं अवमानना कार्यवाही की जाए।
न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि हलफनामे में इस्तेमाल किये गये शब्दों को बिना शर्त माफी मांगने की पेशकश नहीं कहा जा सकता।
न्यायालय ने कहा, ‘‘हम एसोसिएशन के पदाधिकारियों को एक बेहतर हलफनामा दाखिल करने की छूट देते हुए (मौजूदा) हलफनामा खारिज करते हैं और उसे लौटाते हैं। साथ ही, बार एसोसिएशन को इस प्रस्ताव के साथ भी आने को कहते हैं कि भविष्य में इस तरह की हरकतों की पुनरावृत्ति नहीं होगी। ’’
पीठ ने 17 नवंबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘बार एसोसिएशन हड़ताल पर नहीं जाएगा/ या किसी भी तरीके से मुख्य न्यायाधीश पर दबाव नहीं डालेगा और यहां तक कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पर किसी न्यायाधीश या पीठ के रोस्टर में बदलाव करने के लिए दबाव नहीं डालेगा।’’
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने शीर्ष न्यायालय से विषय को स्थगित करने का अनुरोध किया, ताकि बार एसोसिएशन के पदाधिकारी एक बेहतर हलफनामा दाखिल कर सकें और एक प्रस्ताव पारित कर सकें तथा उसे इस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकें।
पीठ ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख 25 नवंबर 2021 की दी है।
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