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टिकाऊ जीवनशैली जरूरी, उपभोक्तावाद के तौर-तरीके पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा: भूपेंद्र यादव

By भाषा | Updated: August 24, 2021 19:57 IST

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि एक टिकाऊ जीवनशैली की जरूरत है क्योंकि उपभोक्तावाद के तौर-तरीके पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने आगाह करते हुए यह भी कहा, ‘‘धरती माता ही हमारा ग्रह हैं और कोई प्लैनेट बी नहीं है।’’ टेरी द्वारा आयोजित 20वें दरबारी सेठ स्मृति व्याख्यान में अध्यक्षीय भाषण देते हुए यादव ने कहा कि विकासशील देश जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील हैं। उन्होंने डिजिटल भाषण में कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन को कम करना जरूरी है लेकिन काफी नहीं है। मान लीजिए कि आज दुनिया ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन रोक भी ले, फिर भी जमा हो चुकीं ग्रीनहाउस गैसें जलवायु संबंधी असर पहुंचाएंगी, जिसके लिए जलवायु परिवर्तन अनुकूलन उपायों पर उचित विचार जरूरी है।’’ पर्यावरण मंत्री ने कहा, ‘‘विकासशील देश उनकी बड़ी आबादी के आजीविका के लिए जलवायु संवेदनशील क्षेत्रों पर निर्भरता के कारण जलवायु परिवर्तन संबंधी प्रभावों के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील हैं।’’ उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक रणनीतियां न केवल प्रभाव कम करने पर केंद्रित होनी चाहिए बल्कि जलवायु अनुकूलन पर भी केंद्रित होनी चाहिए जिसमें वित्त और प्रौद्योगिकी के प्रावधान के लिए स्पष्ट रूपरेखा हो। यादव ने कहा, ‘‘टिकाऊ जीवनशैली जरूरी है क्योंकि उपभोक्तावाद के तौर-तरीके पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं। आदत और रवैया समाधान का बड़ा हिस्सा हैं। समानता और जलवायु न्याय किसी वैश्विक जलवायु प्रतिक्रिया की कसौटी होनी चाहिए, तभी हम कह सकते हैं कि हमने वो रणनीतियां अपनाई हैं जो न्यायोचित हैं और धरती माता के लिए सम्मान हैं, जो हमारा एकमात्र ग्रह है। कोई प्लेनेट बी नहीं है।’’ एनर्जी एंड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट (टेरी) के संस्थापक दरबारी सेठ को उनकी जन्म शती पर याद करते हुए यादव ने कहा कि वह ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के ध्वजवाहक थे। उन्होंने कहा कि हमारे सामने वैश्विक पर्यावरण संबंधी चुनौतियां हैं और उन पर ध्यान देते समय मानव विकास और सतत विकास लक्ष्यों को सुधारने पर भी ध्यान होना चाहिए। यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने टिकाऊ विकास के सभी स्तंभों पर बहुआयामी सोच रखी है जिसमें जलवायु संबंधी कार्रवाई, जैवविविधता संरक्षण, कचरा पुनर्चक्रण, एकल उपयोग वाली प्लास्टिक को चरणबद्ध तरीके से हटाना, जैविक खेती और स्वच्छ ऊर्जा जैसे प्रमुख उपाय हैं। उन्होंने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के लिए पेरिस समझौते के तहत बढ़े हुए लक्ष्य को हासिल करने के रास्ते पर है। यादव ने कहा कि भारत जी20 समूह का एक मात्र देश है, जो अपनी जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के मार्ग पर है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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