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अनुच्छेद 370 पर दायर याचिकाओं पर अंतिरम आदेश जारी करने से कोर्ट का इनकार, कहा- मामले में हो सकती है देरी

By भाषा | Updated: November 15, 2019 02:57 IST

न्यायमूर्ति एन वी रमन की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इस मामले में देरी हो सकती है।

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ठळक मुद्देउच्चतम नयायालय ने संबंधित पक्षों से सभी दस्तावेजों का एक साझा संकलन तैयार करने को भी कहा ताकि मामले की सुनवाई आसान हो जाए। शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को चुनौती देते हुए कोई भी नयी रिट याचिकाएं दायर करने पर पहले रोक लगा दी थी।

 उच्चतम न्यायालय ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र के फैसले की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए दायर की गयी याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एन वी रमन की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इस मामले में देरी हो सकती है तथा उच्चतम न्यायालय सभी पक्षों की बातें सुनने के बाद एक ही बार सारे मुद्दों का हल कर देगा।

न्यायमूर्ति रमन, न्यायमूर्ति एस के कौल, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि वह दस दिसंबर से इस मामले पर दलीलें सुनेगी। शीर्ष अदालत ने केंद्र को भी उन दो नयी याचिकाओं पर जवाब देने को कहा जिसमें अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त किये जाने को लेकर मुद्दे उठाये गये हैं।

हालांकि शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को चुनौती देते हुए कोई भी नयी रिट याचिकाएं दायर करने पर पहले रोक लगा दी थी लेकिन उसने अब कहा कि वह इन दो अर्जियों पर सुनवाई करेगी क्योंकि उनमें महत्वपूर्ण मुद्दे उठाये गये हैं।

उच्चतम नयायालय ने संबंधित पक्षों से सभी दस्तावेजों का एक साझा संकलन तैयार करने को भी कहा ताकि मामले की सुनवाई आसान हो जाए। इन दो नयी याचिकाओं के अलावा कई याचिका पहले से ही शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित हैं। नेशनल कांफ्रेंस, सज्जाद लोन की अगुवाई वाली जम्मू कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेंस, माकपा नेता युसूफ तारिगामी समेत कई राजनीतिक दलों ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र सरकार के पांच अगस्त के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।

जम्मू कश्मीर के लिए 2010-11 में गृह मंत्रालय के वार्ताकार दल की सदस्य प्रोफेसर राधा कुमार, जम्मू कश्मीर कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी हिंदल हैदर तैयबजी, एयर वायस मार्शल (सेवानिवृत) कपिल काक, मेजर जनरल (सेवानिवृत) अशोक कुमार मेहता, पंजाब कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी अमिताभ पांडे और केरल कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी गोपाल पिल्लै जैसे पूर्व नौकरशाहों एवं पूर्व रक्षा अधिकारियों ने भी याचिका दायर कर रखी है। इसके अलावा, नौकरशाह से नेता बने शाह फैसल और उन्हीं की पार्टी की सहयोगी शेहला रशीद ने भी याचिका दायर कर रखी है। 

टॅग्स :धारा ३७०जम्मू कश्मीर
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