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विशेष गहन पुनरीक्षणः 9 राज्य और 3  केंद्र शासित प्रदेश, 51 करोड़ मतदाता, 4 नवंबर से एसआईआर शुरू, 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ समाप्त होगी

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: November 3, 2025 16:19 IST

Special Intensive Revision: दूसरे चरण में, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की कवायद होगी, उनमें अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्यप्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इनमें से तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

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ठळक मुद्देबिहार में अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की गई थी। बिहार में करीब 7.42 करोड़ नामों को मतदाता सूची में शामिल किया गया था।नागरिकता कानून का एक अलग प्रावधान असम में लागू होता है।

नई दिल्लीः निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की कवायद ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) मंगलवार को नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगी। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर प्रक्रिया सात फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ समाप्त होगी। इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 51 करोड़ मतदाता हैं। बिहार के बाद एसआईआर का यह दूसरा चरण है। बिहार में अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की गई थी। बिहार में करीब 7.42 करोड़ नामों को मतदाता सूची में शामिल किया गया था।

दूसरे चरण में, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की कवायद होगी, उनमें अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्यप्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इनमें से तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

असम में भी 2026 में चुनाव होने हैं, लेकिन वहां मतदाता सूची के पुनरीक्षण की घोषणा अलग से की जाएगी, क्योंकि राज्य में नागरिकता सत्यापित करने के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में प्रक्रिया चल रही है। साथ ही नागरिकता कानून का एक अलग प्रावधान असम में लागू होता है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 27 अक्टूबर को एसआईआर के नये चरण की घोषणा करते हुए कहा था, ‘‘नागरिकता अधिनियम के तहत, असम में नागरिकता के लिए अलग प्रावधान हैं। उच्चतम न्यायालय की निगरानी में नागरिकता की जांच का काम पूरा होने वाला है। 24 जून का एसआईआर आदेश पूरे देश के लिए था।

ऐसी परिस्थितियों में, यह असम पर लागू नहीं होता।’’ एसआईआर की प्रक्रिया चार नवंबर को शुरू होगी और चार दिसंबर तक जारी रहेगी। निर्वाचन आयोग नौ दिसंबर को मतदाता सूची का मसौदा जारी करेगा और अंतिम मतदाता सूची सात फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। इससे पहले 2002-04 में एसआईआर किया गया था।

आयोग का मानना ​​है कि एसआईआर से यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए और किसी भी अपात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची में नहीं रहे। एसआईआर का प्राथमिक उद्देश्य अवैध विदेशी प्रवासियों के जन्म स्थान की जांच करके उन्हें सूची से बाहर निकालना है।

बांग्लादेश और म्यांमा सहित अवैध प्रवासियों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में कार्रवाई के मद्देनजर यह कदम महत्वपूर्ण है। जून में बिहार में एसआईआर शुरू किया गया था, तो कई राजनीतिक दलों ने दावा किया था कि दस्तावेजों के अभाव में करोड़ों पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित हो जाएंगे।

जब मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा, तो आयोग ने मतदाता सूची को अद्यतन करने के अपने फैसले का बचाव किया और आश्वासन दिया कि भारत का कोई भी पात्र नागरिक नहीं छूटेगा। अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद, एसआईआर और आयोग पर विपक्ष का हमला शांत हो गया है।

भारतीय लोकतंत्र के लिए मील का पत्थर बनेगा एसआईआर : मुख्य निर्वाचन आयुक्त

मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) को दुनिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी मुहिम करार देते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के लिये मील का पत्थर बताया है। कुमार ने रविवार को आईआईटी-कानपुर के स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार की मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान को 'दुनिया का सबसे बड़ा अभियान' बताया और कहा कि जब यह प्रक्रिया 12 राज्यों के सभी 51 करोड़ मतदाताओं तक पहुंच जाएगी तो यह निर्वाचन आयोग और देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।

कुमार ने कहा, "जब देश में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो लोगों को न केवल निर्वाचन आयोग पर बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक की ताकत पर भी गर्व होगा। यह प्रक्रिया भारतीय लोकतंत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगी।" आईआईटी-कानपुर के छात्र रहे कुमार को इस मौके पर ‘डिस्टिंग्विश्ड एलुमिनस अवार्ड’ भी दिया गया।

उन्होंने कहा, "आईआईटी-कानपुर में बिताए मेरे चार साल मेरे जीवन के सबसे जीवंत और अविस्मरणीय वर्ष हैं।" कुमार ने भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पदों का जिक्र करते हुए कहा, "आज देश के नोट और वोट दोनों ही आईआईटियंस के हाथों में हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "यहाँ (आईआईटी-कानपुर) मैंने जो मूल्य ग्रहण किए हैं उन्होंने मेरे पूरे प्रशासनिक जीवन में मेरा मार्गदर्शन किया है।" कुमार ने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार विधानसभा चुनाव पारदर्शिता, दक्षता और सरलता के नए पैमाने स्थापित करेंगे। कुमार ने अपने शुरुआती दिनों में काशी के घाटों पर गंगा में तैरना सीखने, वाराणसी के क्वींस इंटर कॉलेज में पढ़ाई करने और बाद में आईआईटी कानपुर में दाखिला लेने से पहले लखनऊ में उच्च शिक्षा प्राप्त करने समेत जीवन के तमाम पड़ावों को याद किया।

वाराणसी के घाटों से लेकर देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त बनने तक की यात्रा को याद करते हुए सीईसी ने कहा, "एक लड़का जिसने गंगा में तैरना सीखा, उसने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त की कुर्सी पर बैठेगा।" 

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