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कोरोना संकट के चलते मध्य प्रदेश में लागू हुआ ESMA, जानें क्या होता है एस्मा कानून

By शिवअनुराग पटैरया | Updated: April 8, 2020 14:54 IST

मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस के कुल 313 संक्रमित मामले सामने आए हैं। इसके बाद कोरोना संकट के मद्देनजर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (ESMA) लागू कर दिया है।

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ठळक मुद्देमध्य प्रदेश की बीजेपी नीत शिवराज सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।चौहान ने प्रदेश में अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (ESMA) लागू कर दिया है।

भोपाल: देशभर में फैले कोरोना संकट को देखते हुए मध्य प्रदेश की बीजेपी नीत शिवराज सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (ESMA) लागू कर दिया है। मुख्यमंत्रीशिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर जानकारी दी। इसके तहत अब अति आवश्यक सेवा से जुड़े कर्मचारी और अधिकारी अवकाश या हड़ताल पर नहीं जा सकेंगे। वहीं, कानून का उल्लंघन करने वाले पर कार्रवाई भी की जाएगी। 

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा, ''मंगलवार रात तक मध्य प्रदेश में कुल 313 लोग कोरोना वायरस संक्रमित पाये गये। प्रदेश में सबसे अधिक 173 मरीज इन्दौर में हैं, इसके बाद 85 मरीज भोपाल में, 13 उज्जैन में, 12 मुरैना में, आठ जबलपुर में, छह ग्वालियर में, चार खरगोन में, तीन बड़वानी में, दो-दो मरीज छिंदवाड़ा एवं शिवपुरी में और एक-एक मरीज बैतूल, श्योपुर, होशंगाबाद एवं विदिशा में मिले हैं।  वहीं, एक व्यक्ति ओडिशा के भुवनेश्वर का है, जिसका यहां इलाज चल रहा है।''

उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 23 लोगों की मौत कोरोना वायरस के संक्रमण से हो चुकी है, जिनमें से इंदौर में 15, उज्जैन में पांच एवं भोपाल, खरगोन एवं छिंदवाड़ा में एक-एक व्यक्ति की जान गई है। उन्होंने बताया कि 21 लोग स्वास्थ हो चुके हें। वहीं, 228 मरीजों की हालत स्थिर बनी हुई है, जबकि 20 की स्थिति गंभीर है। पिछले एक सप्ताह में प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव सहित दो आईएएस अधिकारी कोविड-19 के संक्रमण की चपेट में आए हैं। भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर सुधीर डेहरिया ने कहा, ''भोपाल में कोविड-19 से अब तक 85 लोग संक्रमित पाये गये हैं। इनमें 40 स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और 12 पुलिसकर्मी शामिल हैं।

जानें क्या है एस्मा (ESMA) अधिनियम? एस्मा अधिनियम को 1968 में लागू किया गया था। इसके जरिए हड़ताल के दौरान लोगों के जनजीवन को प्रभावित करने वाली आवश्यक सेवा की बहाली सुनिश्चित कराने की कोशिश की जाती है। राज्य सरकारें स्वयं भी किसी सेवा को आवश्यक सेवा घोषित कर सकती हैं। बता दें कि एस्मा के तहत डाक सेवाओं, रेलवे, हवाई अड्डों समेत विभिन्न आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी की शामिल किए जाते हैं।

एस्मा लागू होने के के बाद से हड़ताल को अवैध माना जाता है। इसके साथ ही अगर कोई कर्मचारी इसका उल्लंघन करता है और दोषी पाया जाता है तो उसे एक साल की सजा का प्रावधान भी है। क्रिमिनल प्रोसीजर 1985 (5 ऑफ 1985)  के अन्‍तर्गत एस्‍मा लागू होने के उपरान्‍त इस आदेश से संबंधित किसी भी कर्मचारी को बिना किसी वॉरन्‍ट के गिरफतार किया जा सकता है।

तबलीगी जमात से लौटे छिपे लोगों को शिवराज सिंह चौहान की चेतावनी 

इससे पहले बुधवार को शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के एक कार्यक्रम में शामिल लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इसमें शामिल लोगों ने अगले 24 घंटे के अन्दर स्वयं प्रशासन को अपनी जानकारी नहीं दी तो प्रदेश सरकार उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई करेगी। कार्यक्रम में शामिल सैकड़ों सदस्य कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं और कई लोगों की जान भी गई है। 

चौहान ने ट्वीट किया, '' मध्य प्रदेश से निज़ामुद्दीन मरकज़ में गये सभी नागरिकों और विदेश से आ कर मस्जिदों में छुपे लोगों की पहचान कर सबको प्रशासन ने पृथक कर दिया है।'' उन्होंने कहा, ''इसके बाद भी अगर कोई कहीं छुपा हुआ है, तो मेरा उनसे आग्रह है कि अगले 24 घंटे के अन्दर वे स्वयं प्रशासन को इसकी जानकारी दें।'' चौहान ने आगे लिखा, ''ऐसा न करने पर देश और प्रदेश की सुरक्षा संकट में डालने के आरोप में उन पर प्रशासन द्वारा आपराधिक प्रकरण दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।'' 

 

टॅग्स :कोरोना वायरसमध्य प्रदेश में कोरोनासीओवीआईडी-19 इंडियाशिवराज सिंह चौहानभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)
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