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रामचरितमानस विवाद पर अखिलेश यादव की सीएम योगी को दो टूक, बोले- "मैं सीधे सदन में पूछूंगा कि शूद्र कौन है..."

By अंजली चौहान | Updated: January 30, 2023 17:44 IST

अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमला करते हुए कहा कि हमारे मुख्यमंत्री योगी जो एक संस्था से आए हैं। उसका अपना एक इतिहास रहा है।

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ठळक मुद्देयूपी में इन दिनों रामचरितमानस को लेकर राजनीति गर्म है। रामचरितमानस विवाद पर अखिलेश यादव बोले मैं सीएम योगी से पूछूंगा कौन शुद्र है।अखिलेश यादव ने सीएम योगी पर कसा करारा तंज।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में रामचरितमानस की चौपाई को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान के बाद रामचरितमानस पर यूपी की राजनीति में बयानबाजी का दौर जारी है। इस घमासान में अब पूर्व सीएम अखिलेश यादव भी कूद पड़े हैं। 

अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमला करते हुए कहा कि हमारे मुख्यमंत्री योगी जो एक संस्था से आए हैं। उसका अपना एक इतिहास रहा है और मैं उनसे सीधा सवाल करूंगा रामचरितमानस और शूद्रों को लेकर। मैं पूछूंगा कि शूद्र कौन-कौन है, सदन में बताइए, ये हमारा आपका सवाल नहीं है, ये धार्मिक लोगों का सवाल है। 

गौरतलब है कि सपा नेता के विवादित टिप्पणी के बाद यूपी में उनका जमकर विरोध हो रहा है। विरोध के बाद अखिलेश यादव भी अपने नेता के बचाव में उतर आए हैं और राज्य सरकार को घेरने में जुटे हुए हैं। उन्होंने विरोध कर रहे हिंदू संगठनों को लेकर कहा कि ये बीजेपी के भेजे हुए गुंडे थे, बीजेपी धर्म की ठेकेदार नहीं हो सकती है। 

मंदिर दर्शन के लिए गए अखिलेश यादव को हिंदू संगठनों ने दिखाए काले झंडे

गौरतलब है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव शनिवार को लखनऊ में गोमती नदी केकिनारे स्थित मां पीतांबरा मंदिर में 108 महायज्ञ में सामिल होने के लिए गए थे। अखिलेश यादव जब पीतांबरा मंदिर पहुंचे तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। दरअसल, हिंदू महासभा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने अखिलेश यादव को काले झंडे दिखाए। 

हिंदू संगठनों के विरोध से अखिलेश यादव भड़क गए और उन्होंने इसके लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने यहां गुड़े भेजे थे। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि आज भी कुछ लोग मंदिर प्रवेश का अधिकार हर किसी को नहीं देना चाहते हैं। सच तो ये है कि किसी मंदिर जाने से रोके, वो अधर्मी है क्योंकि वो धर्म के मार्ग में बाधा बन रहा है। 

बता दें कि ये सारा बवाल स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान के बाद शुरू हुआ है। स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस को लेकर कहा था कि रामचरितमानस में दलितों और महिलाओं का अपमान किया गया है। तुलसीदास ने इसे अपनी खुशी के लिए लिखा था। करोड़ों लोग इसे नहीं पढ़ते। 

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