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राफेल डील में भारतीय बिचौलिए को गिफ्ट के तौर पर दिए गए 8 करोड़ रुपये, फ्रांसीसी वेबसाइट का दावा

By विनीत कुमार | Updated: April 5, 2021 16:12 IST

फ्रांस के साथ राफेल सौदे को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। एक फ्रांसीसी वेबसाइट ने दावा किया है कि एक भारतीय बिचौलिए को 10 लाख यूरो दिए गए हैं।

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ठळक मुद्देराफेल बनाने वाली कंपनी दसॉ ने भारतीय बिचौलिए को दिए 8 करोड़ रुपये, फ्रांसीसी वेबसाइट का दावारिपोर्ट के अनुसार फ्रांस की एजेंसी की जांच में सामने आई थी बात लेकिन उसे नजरअंदाज किया गयाफ्रांसीसी वेबसाइट के अनुसार राफेल सौदे संबंधी उसकी जांच के अभी दो और रिपोर्ट प्रकाशित होने हैं

फ्रांस की राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉ ने इन लड़ाकू विमानों को लेकर भारत-फ्रांस में साल 2016 में हुए करार के बाद 10 लाख यूरो (करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये) भारत में एक बिचौलिए को देने पर रजामंदी जताई थी। ये दावा फ्रांस की एक वेबसाइट मीडियापार्ट ने किया है। 

फ्रांसीसी वेबसाइट की जांच के अनुसार साल 2017 में राफेल बनाने वाली दसॉ ग्रुप के खाते से 508,925 यूरो 'क्लाइंट को गिफ्ट' के तहत अदा किए गए। ये अनियमितता सबसे पहले फ्रेंच एंटी करप्शन एजेंसी के ऑडिट में सामने आई थी।

मीडियापार्ट की ओर से इस गुप्त ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए रविवार शाम रिपोर्ट किया गया, 'कंपनी ने कहा था कि पैसों को इस्तेमाल राफेल विमान जैसे दिखने वाले 50 बड़े मॉडल बनाने के लिए किया गया था हालांकि जांचकर्ताओं को इस बात के सबूत नहीं दिए गए कि ऐसा कुछ बनाया गया था।'  

Rafale Deal: ऑडिट में हुआ खुलासा पर किया गया नजरअंदाज

रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी के खातों में अन्य एंट्री के मुकाबले ये नंबर बहुत बड़ी और अप्रत्याशित नजर आई। फ्रांसीसी भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने हालांकि कथित भुगतान को नजरअंदाज किया। फ्रांसीसी वेबसाइट के अनुसार ये न्याय प्रणाली और राजनीतिक अधिकारियों दोनों पर ही सवाल खड़े करता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार अक्टूबर 2018 में फ्रांसीसी सार्वजनिक अभियोजन सेवाओं की वित्तीय अपराधों की शाखा, पारक्वेट नेशनल फाइनेंसर (पीएनएफ) को इस भ्रष्टाचार के संबंध में जानकारी मिली थी। इसी दौरान ये जांच भी की गई थी। मीडियापार्ट की रिपोर्ट के अनुसार दसॉ ग्रुप ने राशि दिए जाने के संबंध में एक भारतीय कंपनी डेफसिस सॉल्यूशन का बिल (इनवॉयस) दिखाया था। ये बिल 30 मार्च 2017 है। इसमें कहा गया है कि भारतीय कंपनी ने राफेल की डमी बनाने के लिए 50 प्रतिशत यानी 1,017,850 का भुगतान किया था। हर डमी की कीमत 20,357 यूरो बताई गई।

दसॉ के पास नहीं था एजेंसी के सवालों का जवाब

कंपनी इन डमी को हालांकि जांचकर्ताओं के सामने पेश करने में नाकाम रही। साथ ही कंपनी ये भी नहीं बता सकी कि इन खर्चों को 'क्लायंट को गिफ्ट' के तौर पर दर्ज क्यों किया गया है। ये भी खुलासा नहीं हुआ है कि पैसे किसे दिए गए।

बता दें कि जिस भारतीय कंपनी डेफसिस की बात हो रही है वो दसॉ की सबकॉन्ट्रैक्टर में से एक है और इसका जुड़ाव बिजनेसमैन सुशेन गुप्ता से रहा है। गुप्ता को पहले अगस्तावेस्टलैंड वीवीआई चॉपर केस में गिरफ्तार भी किया जा चुका है और बाद में जमानत भी दिया गया था।

वहीं, इंडिया टुडे के अनुसार फ्रांसीसी वेबसाइट ने जो रिपोर्ट जारी की है, वो पहला हिस्सा है। मीडियापार्ट के रिपोर्टर यान फिलिपिन ने बताया है कि कुल तीन हिस्से हैं। मामले में सबसे बड़ा खुलासा तीसरे हिस्से में होना है। 

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