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नई राजनीतिक पार्टी शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं कैप्टन अमरिंदर सिंह, सिद्धू विरोधियों को मिलेगी तरजीह

By विशाल कुमार | Updated: October 2, 2021 10:44 IST

यह पहली बार नहीं है जब कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी पार्टी बनाने पर विचार कर रहे हैं. जब उन्होंने 2014-2015 में पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ विद्रोह किया था, तो उन्होंने अपने समर्थकों के साथ एक राजनीतिक पार्टी शुरू करने का फैसला किया था.

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ठळक मुद्देअमरिंदर के खेमे के सूत्रों का कहना है कि उनकी पार्टी में नवोजत सिंह सिद्धू (पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष) का विरोध करने वाले नेता होंगे.नई पार्टी का संविधान तैयार किया जा रहा है. पंजाब विकास पार्टी (पीवीपी) के नाम पर आम सहमति, लेकिन फिलहाल यह अंतिम नहीं है.सूत्रों ने कहा कि अमरिंदर ने पहले गांधी जयंती पर अपने समर्थकों की एक बैठक आयोजित करने का फैसला किया था, लेकिन अब यह टाल दिया गया है.

चंडीगढ़:पंजाब के मुख्यमंत्री का पद छोड़ने और कांग्रेस द्वारा अपमानित किए जाने की बात कहने के दो हफ्ते बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी राजनीतिक पार्टी शुरू करने की पूरी तैयारी कर चुके हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अमरिंदर के खेमे के सूत्रों का कहना है कि उनकी पार्टी में नवोजत सिंह सिद्धू (पंजाबकांग्रेस अध्यक्ष) का विरोध करने वाले नेता होंगे. नई पार्टी का संविधान तैयार किया जा रहा है. हम चार नामों पर विचार कर रहे हैं. फिलहाल हमने पंजाब विकास पार्टी (पीवीपी) के बारे में सोचा है. इस नाम पर आम सहमति है लेकिन फिलहाल यह अंतिम नहीं है.

बता दें कि, इस्तीफा देने के बाद जब अमरिंदर दिल्ली गए तो उनके भाजपा में जाने की अटकलें लगाई जाने लगी थीं. इस दौरान उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की थी.

हालांकि, मुलाकात के बाद अमरिंदर ने गुरुवार को कहा था कि वह कांग्रेस छोड़ देंगे लेकिन भाजपा में शामिल नहीं होंगे. उन्होंने यह भी कहा था कि वह अगले साल राज्य के चुनावों में सिद्धू के खिलाफ एक मजबूत उम्मीदवार खड़ा करेंगे, जिनके कड़े विरोध के कारण ही उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा.

सूत्रों ने कहा कि अमरिंदर ने पहले गांधी जयंती पर अपने समर्थकों की एक बैठक आयोजित करने का फैसला किया था, लेकिन अब यह टाल दिया गया है.

सूत्रों ने कहा कि हम जल्द ही बैठक करेंगे. कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है.

अमरिंदर सिंह के एक समर्थक ने कहा कि उन्होंने (अमरिंदर) समर्थकों से कहा है कि वह भाजपा के साथ नहीं जाएंगे. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमें भाजपा से मौन समर्थन नहीं मिल सकता. हमारी राजनीति सत्ता पाने के लिए नहीं, सिद्धू को मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए है. यदि हमारे उम्मीदवार 3,000-4,000 वोट भी प्राप्त करने में सक्षम हैं, तो वे एक बहु-कोणीय चुनाव को बिगाड़ने वाले साबित हो सकते हैं, जिसमें उनका सामना शिरोमणि अकाली दल और आप से होने की है. यह कांग्रेस उम्मीदवारों की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है.

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब अमरिंदर अपनी पार्टी बनाने पर विचार कर रहे हैं. जब उन्होंने 2014-2015 में पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ विद्रोह किया था, तो उन्होंने अपने समर्थकों के साथ एक राजनीतिक पार्टी शुरू करने का फैसला किया था. हालाँकि, उनके कुछ समर्थकों ने उस समय कहा था कि वे कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे, जिसके बाद योजना को रोक दिया गया था.

इस बीच, देहरादून में एआईसीसी के पंजाब प्रभारी महासचिव हरीश रावत ने अमरिंदर की इस टिप्पणी को खारिज कर दिया कि उन्हें अपमानित किया गया था और कहा कि कांग्रेस हमेशा उन्हें पूरा सम्मान दिया है.

रावत ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ गुरुवार को पूर्व सीएम की बैठक के बाद अमरिंदर की धर्मनिरपेक्ष साख पर भी सवालिया निशान लगाया.

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