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प्रोजेक्ट-75 की अंतिम पनडुब्बी 'वाग्शीर' का समुद्री परीक्षण शुरू, 2024 में भारतीय नौसेना को सौंप दिया जाएगा

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: May 19, 2023 14:51 IST

परियोजना-75 के तहत पहली सबमरीन INS कलवरी को भारतीय नौसेना में दिसंबर 2017, दूसरी सबमरीन INS खंडेरी को सितंबर 2019 में, तीसरी सबमरीन INS करंज को मार्च 2021 में, चौथी INS वेला को नवंबर 2021, और पांचवी INS 'वागीर' को दिसंबर 2022 में सेवा में शामिल किया गया था।

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ठळक मुद्देकलवारी श्रेणी की पनडुब्बी वाग्शीर ने अपना समुद्री परीक्षण शुरू कर दिया हैप्रोजेक्ट-75 के तहत बनाई जा रही छठी और अंतिम पनडुब्बी है वाग्शीरपरीक्षण पूरा होने के बाद वाग्शीर को साल 2024 में भारतीय नौसेना को सौंप दिया जाएगा

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना को मजबूत करने के लिए प्रोजेक्ट-75 के तहत बनाई जा रही 6 पनडुब्बियों की छठी और अंतिम कलवारी श्रेणी की पनडुब्बी वाग्शीर ने अपना समुद्री परीक्षण शुरू कर दिया है। प्रोजेक्ट-75 की छठी पनडुब्बी का समुद्री परीक्षण गुरुवार को ही शुरू हो गया था। 

परीक्षण पूरा होने के बाद वाग्शीर को साल 2024 में भारतीय नौसेना को सौंप दिया जाएगा। हिंद महासागर में भारतीय नौसेना पाकिस्तान पर हमेशा भारी रही है। लेकिन पिछले कुछ सालों से चीन द्वारा मिल रही चुनौती को देखते हुए वाघशीर का नौसेना में शामिल होना बड़ा कदम होगा। हिंद महासागर में पिछले कुछ समय से चीनी युद्धपोतों और पनडुब्बियों की उपस्थिति देखी गई है। रक्षा विशेषज्ञ ये भी कहते हैं कि भारत को अगला युद्ध चीन और पाकिस्तान से एक साथ लड़ना होगा। इसे देखते हुए नौसेना के मजबूत करने की काम किया जा रहा है।

वाग्शीर को पिछले साल अप्रैल में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) के कान्होजी आंग्रे वेट बेसिन से लॉन्च किया गया था। एमडीएल ने 24 महीनों में परियोजना की तीन पनडुब्बियों की डिलीवरी की है और छठी पनडुब्बी का समुद्री परीक्षण शुरू होना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ावा का संकेत है।

समुद्री परीक्षण के दौरान वाग्शीर अब समुद्र में अपनी सभी प्रणालियों के गहन परीक्षणों से गुजरेगी, इनमें प्रणोदन प्रणाली, हथियार और सेंसर शामिल हैं। वाग्शीर का नाम सैंड फिश के नाम पर रखा गया है- जो हिंद महासागर की एक घातक गहरे समुद्र की शिकारी है। इसी नाम की सोवियत संघ से मिली पनडुब्बी को 26 दिसंबर 1974 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था और राष्ट्र के लिए लगभग तीन दशकों की सेवा के बाद 30 अप्रैल 1997 को सेवामुक्त कर दिया गया था।

बता दें कि कलवरी-श्रेणी की पनडुब्बियों में युद्ध-रोधी और सबमरीन-रोधी संचालन, खुफिया जानकारी एकत्र करने और निगरानी तथा माइन बिछाने सहित विभिन्न प्रकार के नौसेना युद्धों में संचालन की क्षमता है।  यह पनडुब्बी लगभग सभी प्रकार की परिस्थितियों में संचालित करने के लिये डिज़ाइन की गई है। यह पानी के नीचे या सतह पर टॉरपीडो और ट्यूब लॉन्च एंटी-शिप मिसाइल दोनों के साथ हमला कर सकती है। 

परियोजना-75 के तहत पहली सबमरीन INS कलवरी को भारतीय नौसेना में दिसंबर 2017, दूसरी सबमरीन INS खंडेरी को सितंबर 2019 में, तीसरी सबमरीन INS करंज को मार्च 2021 में, चौथी INS वेला को नवंबर 2021, और पांचवी  INS 'वागीर' को दिसंबर 2022 में सेवा में शामिल किया गया था।

टॅग्स :भारतीय नौसेनामिसाइलपाकिस्तानचीन
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