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जिनपिंग ने पीएम मोदी को चीन आने का दिया न्योता, विदेश सचिव विजय गोखले बोले- बातचीत में नहीं उठा कश्मीर का मुद्दा

By विनीत कुमार | Updated: October 12, 2019 13:56 IST

पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अनौपचारिक समिट खत्म होने के बाद विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच इस दौरान करीब 6 घंटे बातचीत हुई।

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ठळक मुद्देपीएम मोदी-जिनपिंग के बीच अनौपचारिक समिट के दौरान नहीं उठा कश्मीर का मुद्दा: विदेश सचिवजिनपिंग अपने भारत दौरे से खुश, दोनों देशों के लोगों के बीच रिश्ते मजबूत करने पर भी हुआ विचार: विदेश सचिव

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अनौपचारिक समिट के बाद विदेश सचिव विजय गोखले ने शनिवार को जानकारी दी इस बातचीत के दौरान कभी भी कश्मीर का मुद्दा नहीं उठा।

विजय गोखले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'यह मुद्दा चर्चा में नहीं उठा। वैसे भी हमारी स्थिति साफ थी कि यह भारत का आंतरिक मामला है।' विदेश सचिव ने साथ ही बताया जिनपिंग अपनी भारत यात्रा से काफी खुश हुए और उन्होंने पीएम मोदी को चीन आने का भी न्योता दिया है। विदेश सचिव के अनुसार पीएम मोदी ने न्योता स्वीकार कर लिया है लेकिन तारीखों का ऐलान बाद में किया जाएगा।

विदेश सचिव के अनुसार दोनों नेताओं के बीच करीब 6 घंटे बातचीत हुई। विजय गोखले ने कहा, 'प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत से पहले दोनों नेताओं के बीच करीब 90 मिनट की बातचीत हुई। इसके बाद पीएम मोदी लंच के मेजबान भी बने। कुल मिलाकर इस समिट के दौरान दोनों नेताओं के बीच 6 घंटे की बातचीत हुई।'

विजय गोखले ने ये भी बताया, 'दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सर्विस पर चर्चा के लिए एक नई व्यवस्था की शुरुआत की शुरुआत की जाएगी। चीन की ओर से वाइस प्रीमियर हु चुन्हुआ और भारत की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस संबंध में बातचीत को आगे बढ़ाएंगे।' साथ ही विजय गोखले मे कहा, 'शी जिनपिंग ने तमिलनाडु में उनके भव्य स्वागत के लिए भारत को धन्यवाद कहा है।'

विदेश सचिव के अनुसार, 'इस समिट के दौरान लोगों के लोगों से जुड़ाव पर ध्यान था। यह फैसला लिया गया कि दोनों देशों के लोगों के बीच भी रिश्ते और मजबूत होने चाहिए। इसे लेकर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।'

विदेश सचिव ने कहा, 'प्रेसिडेंट शी ने मानसरोवर जाने वाले यात्रियों के लिए और सुविधाओं के बारे में बात की। पीएम मोदी ने भी तमिलनाडु और चीन के फुजियान प्रांत के बीच जुड़ाव बढ़ाने को लेकर भी अपने विचार दिये। दोनों नेता इस बात पर भी सहमत हुए कि आतंकवाद और चरमपंथ की चुनौती से निपटना जरूरी है।'

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