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ज्ञानवापी विवाद में कल आयेगा वाराणसी की जिला अदालत का आदेश, पूरे शहर में धारा 144 लागू, चप्पे-चप्पे पर हुई पुलिस की तैनाती

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: September 11, 2022 20:00 IST

ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी के विवादित मामले में सुनवाई करने वाले वाराणसी के जिला न्यायाधीश एके विश्वेश ने पिछले महीने सुनवाई पूरी कर ली थी, लेकिन अपने आदेश को 12 सितंबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया था।

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ठळक मुद्देज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी विवाद में कल आयेगी वाराणसी की जिला अदालत का आदेश वाराणसी में लागू हुई धारा 144 साथ ही पुलिस सुरक्षा को किया गया और भी कड़ा वाराणसी के जिला न्यायाधीश एके विश्वेश ने पिछले महीने ही मामले की सुनवाई कर ली थी पूरी

वाराणसी: ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी विवाद में दायर याचिका के संबंध में वाराणसी की जिला अदालत द्वारा सोमवार को आदेश आने से पहले पूरे वाराणसी में धारा 144 यानी निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है साथ ही पुलिस सुरक्षा को और कड़ा कर दिया गया है।

विवादित मामले में सुनवाई करने वाले वाराणसी के जिला न्यायाधीश एके विश्वेश ने पिछले महीने सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली थी, लेकिन अपने आदेश को 12 सितंबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया था।

इस संबंध में वाराणसी के पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने रविवार को कहा कि पूरे वाराणसी में निषेधाज्ञा जारी कर दी गई है और पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में धार्मिक नेताओं से बातचीत करने को कहा गया है ताकि सभी क्षेत्रों में शांति और कानून व्यवस्था को यथावत रखा जा सकें।

पुलिस आयुक्त वाराणसी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि वाराणसी के शहरी इलाके में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पूरे शहर को सेक्टरों में बांटा गया है, अगर कोई अप्रीय घटना होती है तो सेक्टर के हिसाब से आवश्यक पुलिस बल का आवंटन किया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सांप्रदायिक तौर पर संवेदनशील इलाकों में पुलिस को विशेष फ्लैग मार्च और पैदल मार्च करने का भी निर्देश जारी किया गया है।

वहीं साथ में वाराणसी से जिले के सीमावर्ती जिलों मसलन चंदौलीस गाजीपुर, मिर्जापुर से सटे इलाकों में होटलों और गेस्ट हाउसों में चेकिंग भी की जा रही है और साथ में पुलिस सोशल मीडिया पर भी अपनी पैनी निगाहें बनाये रखेगी।

मालूम हो कि श्रंगारगौरी की रोजाना पूजन के लिए पांच महिलाओं ने वाराणसी की कोर्ट में याचिका दायर करके इजाजत मांगी थी, जो ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर में स्थित हैं। वहीं याचिका के विरोध में अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति ने कहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद एक वक्फ संपत्ति है और 1991 के वर्शिप एक्ट के तहत यह मांग पूरी तरह से लगत है। इसलिए कोर्ट को यह याचिका सुननी ही नहीं चाहिए। 

वहीं हिंदू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव का कहना है कि चूंकि मंदिर को तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया गया था। इसलिए महिलाओं को पूजा का अधिकार मिलना चाहिए। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था, कोर्ट ने मामले में वाराणसी के जिला अदालत को सुनवाई का आदेश दिया था, जिसके आधार पर इस मुद्दे की सुनवाई वाराणसी की कोर्ट में हुई थी, जिसका आदेश सोमवार को आना है।

उससे पहले वाराणसी की निचली अदालत ने ज्ञानवापी परिसर के वीडियोग्राफी का भी आदेश दिया था। जिसपर मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई थी। उसके बाद भी 16 मई को परिसर की वीडियोग्राफी की गई और 19 मई को कोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई थी।

वीडियोग्राफी के बाद हिंदू पक्ष ने निचली अदालत में दावा किया था कि ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी परिसर में वीडियोग्राफी के दौरान एक शिवलिंग मिला था लेकिन मुस्लिम पक्ष ने उसे फव्वारा बताते हुए हिंदू पक्ष के दावे का खंडन और विरोध किया था। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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