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लंदन में नीरव मोदी गिरफ्तार लेकिन आसान नहीं है भारत लाने की राह, जानें प्रत्यर्पण की प्रक्रिया

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 20, 2019 16:55 IST

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ठळक मुद्दे दो अरब डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक घोटाला मामले में वांछित भगोड़े कारोबारी को भारत वापस लाने के प्रयासों की दिशा में इसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। नीरव मोदी को अदालत में पेश किये जाने के बाद औपचारिक तौर पर उसके खिलाफ आरोप तय किये जाएंगे।

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बुधवार को स्कॉटलैंड यार्ड ने गिरफ्तार कर लिया। करीब दो अरब डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक घोटाला मामले में वांछित भगोड़े कारोबारी को भारत वापस लाने के प्रयासों की दिशा में इसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। प्रत्यर्पण निदेशालय ने मनी लौंड्रिंग के एक मामले में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिये लंदन की एक अदालत में अपील की थी। 

अदालत ने अपील पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को नीरव मोदी के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। स्कॉटलैंड यार्ड ने एक बयान में कहा, ‘‘नीरव दीपक मोदी (जन्मतिथि: 24 फरवरी 1971) को भारतीय एजेंसियों की तरफ से 19 मार्च को हॉलबार्न में गिरफ्तार कर लिया गया। उसे 20 मार्च को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा।’’ 

गिरफ्तारी की जगह से इस बात के संकेत मिलते हैं कि नीरव मोदी वेस्ट एंड के सेंटर पाइंट के उसी आलीशान अपार्टमेंट में रह रहा था जहां उसके होने की आशंका व्यक्त की जा रही थी। ऐसा लग रहा है कि उसे प्रत्यर्पण वारंट पर गिरफ्तार किया गया है। नीरव मोदी को अदालत में पेश किये जाने के बाद इस बारे में स्थिति स्पष्ट होगी। 

नीरव मोदी की जल्द वापसी में कई अड़चनें 

नीरव मोदी को अदालत में पेश किये जाने के बाद औपचारिक तौर पर उसके खिलाफ आरोप तय किये जाएंगे। इसके बाद वह जमानत की अपील कर सकता है। बाद में इस मामले में भी ब्रिटेन की अदालत की उन्हीं प्रक्रियाओं का दोहराव होगा जो धोखाधड़ी एवं मनी लौंड्रिंग के मामले में अप्रैल 2017 में विजय माल्या की गिरफ्तारी के बाद हुआ है।

कोर्ट प्रत्यर्पण के फैसले को सुना सकता है। फैसला के बाद गृह सचिव को इसकी सिफारिश करते हैं तो नीरव मोदी के पास उस फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करने का मौका होगा। अपील करने के लिए 14 दिनों का वक्त दिया जाता है। इसके अलावा नीरव मोदी यूरोपियन कोर्ट की ओर भी रुख कर सकते हैं। प्रत्यर्पण पर अंतिम फैसला गृह सचिव का होगा।

अब तक सिर्फ एक भारतीय वापस लाया गया

22 सितंबर 1992 को भारत और ब्रिटेन के बीच प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर होने के बाद अब तक सिर्फ एक भारतीय को वापस लाया जा सका है। पिछले 27 सालों में भारत ने ब्रिटेन से नदीम सैफी (गुलशान कुमार केस के आरोपी हत्यारे), रवि शंकरन (नेवी वॉर रूप ली), टाइगर हनीफ (1993 गुजरात विस्फोट), विजय माल्या ( बैंक फ्रॉड) को प्रत्यर्पित करने अपील की है। 2002 के गुजरात दंगों के मामले में समीर भाई वीनू भाई पटेल को 18 अक्तूबर 2016 को ब्रिटेन से भारत लाया गया था जो ब्रिटेन से प्रत्यर्पण के मामले में मिली एक मात्र सफलता है।

विजय माल्या के मामले में क्या हुआ

लंदन वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने 10 दिसंबर 2018 को शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया।  माल्या उसके बाद से जमानत पर है। तीन महीने बाद ही अब तक माल्या को भारत नहीं लाया जा सका है।

भारत से तीन प्रत्यर्पण

15 नवंबर 1993 को लागू हुए भारत-ब्रिटेन प्रत्यर्पण संधि के तहत, मनिंदर पाल सिंह, सोमैया केतन सुरेंद्र और कुलविंदर सिंह उप्पल को भारत से  ब्रिटेन प्रत्यर्पित किया गया है।

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