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सुषमा स्वराज पर पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ की टिप्पणी की जयशंकर ने की निंदा, कही ये बात

By मनाली रस्तोगी | Updated: January 25, 2023 15:17 IST

सुषमा स्वराज ने मई 2014 से मई 2019 तक पहली मोदी सरकार में विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। अगस्त 2019 में उनका निधन हो गया।

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ठळक मुद्देअमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि उन्होंने अपनी भारतीय समकक्ष सुषमा स्वराज को कभी "महत्वपूर्ण राजनीतिक शख्सियत" के रूप में नहीं देखाजयशंकर ने स्वराज पर पोम्पिओ की टिप्पणी की निंदा कीस्वराज पर पोम्पिओ की टिप्पणियों की निंदा करते हुए जयशंकर ने कहा कि उनके साथ उनके "असाधारण" संबंध थे

नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने नई किताब 'नेवर गिव एन इंच: फाइटिंग फॉर अमेरिका आई लव' में कहा कि उन्होंने अपनी भारतीय समकक्ष सुषमा स्वराज को कभी "महत्वपूर्ण राजनीतिक शख्सियत" के रूप में नहीं देखा लेकिन विदेश मंत्री एस जयशंकर से पहली मुलाकात में ही अच्छे मित्रवत रिश्ते बन गए थे। वहीं, जयशंकर ने स्वराज पर पोम्पिओ की टिप्पणी की निंदा की। 

स्वराज पर पोम्पिओ की टिप्पणियों की निंदा करते हुए जयशंकर ने कहा कि उनके साथ उनके "असाधारण" संबंध थे। पीटीआई से बात करते हुए जयशंकर ने कहा, "मैंने मंत्री पोम्पिओ की किताब में श्रीमती सुषमा स्वराज जी का जिक्र करने वाला एक अंश देखा है। मैंने हमेशा उनका बहुत सम्मान किया और उनके साथ मेरे बेहद करीबी और मधुर संबंध थे। मैं उनके लिए इस्तेमाल की जाने वाली अपमानजनक शब्दावली की निंदा करता हूं।"

बता दें कि सुषमा स्वराज ने मई 2014 से मई 2019 तक पहली मोदी सरकार में विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। अगस्त 2019 में उनका निधन हो गया। अपनी नई किताब 'नेवर गिव एन इंच: फाइटिंग फॉर अमेरिका आई लव' में पोम्पिओ ने सुषमा स्वराज को उपहास जनक शब्दों में वर्णित किया है और उनके बारे में आम भाषा के उपहासजनक शब्द जैसे नासमझ आदि का भी प्रयोग किया है। यह किताब मंगलवार को बाजार में आई है।

पोम्पिओ (59) ने अपनी किताब में लिखा है, "भारतीय पक्ष में, मेरी मूल समकक्ष भारतीय विदेश नीति टीम में महत्वपूर्ण शख्सियत नहीं थी। इसके बजाय, मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी और विश्वासपात्र राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ और अधिक निकटता से काम किया।" पोम्पिओ 2017 से 2018 तक उनके प्रशासन में सीआईए निदेशक थे और फिर 2018 से 2021 तक विदेश मंत्री रहे। 

उन्होंने कहा, "मेरे दूसरे भारतीय समकक्ष सुब्रह्मण्यम जयशंकर थे। मई 2019 में, हमने "जे" का भारत के नए विदेश मंत्री के रूप में स्वागत किया। मैं इससे बेहतर समकक्ष के लिए नहीं कह सकता था। मैं इस व्यक्ति को पसंद करता हूं। अंग्रेजी उन सात भाषाओं में से एक है जो वह बोलते हैं और वह मेरे से बेहतर हैं।" पोम्पिओ ने जयशंकर को 'पेशेवर, तार्किक और अपने बॉस तथा अपने देश के बड़े रक्षक' के तौर पर वर्णित किया है। 

उन्होंने कहा, "हम फौरन दोस्त बन गए। हमारी पहली मुलाकात में मैं बहुत ही कूटनीतिक भाषा में शिकायत कर रहा था कि उनकी पूर्ववर्ती विशेष रूप से मददगार नहीं थी।" अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने अपनी किताब में यह भी कहा है कि अमेरिका द्वारा भारत की उपेक्षा करना दोनों पक्षों की दशकों पुरानी विफलता थी।

(भाषा इनपुट के साथ)

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