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कानूनन सेक्स वर्कर को ना कहने का अधिकार लेकिन शादीशुदा महिला को नहीं, वैवाहिक रेप को आपराधिक ठहराने वाले जज ने कहा

By विशाल कुमार | Updated: May 12, 2022 07:45 IST

वैवाहिक बलात्कार को आपराधिक बनाने के मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट के दो जजों की पीठ द्वारा अलग-अलग फैसला सुनाए जाने के दौरान जस्टिस राजीव शकधर ने बुधवार को कहा कि यह अदालतों पर निर्भर है कि वे जटिल सामाजिक मुद्दों से संबंधित निर्णय लें, न कि उन्हें पीछे छोड़ दें।

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ठळक मुद्देवाहिक बलात्कार को आपराधिक बनाने के मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कल फैसला सुनाया। दिल्ली हाईकोर्ट के दो जजों की पीठ ने अलग-अलग सुनाए फैसले।जस्टिस शकधर ने कहा कि उन्होंने कहा कि राज्य के पास विवाह को बचाने का एक वैध हित नहीं हो सकता है जब विवाह ही अत्याचार हो।

नई दिल्ली: वैवाहिक बलात्कार को आपराधिक बनाने के मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट के दो जजों की पीठ द्वारा अलग-अलग फैसला सुनाए जाने के दौरान जस्टिस राजीव शकधर ने बुधवार को कहा कि यह अदालतों पर निर्भर है कि वे जटिल सामाजिक मुद्दों से संबंधित निर्णय लें, न कि उन्हें पीछे छोड़ दें।

आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) के तहत आपराधिक मुकदमा चलाने से अपनी पत्नियों के साथ गैर-सहमति से संभोग करने वाले पुरुषों की रक्षा करने वाली धारा 375 के अपवाद 2 पर फैसला सुनाते हुए, जस्टिस शकधर ने कहा कि कानून द्वारा एक यौनकर्मी को 'नहीं' का अधिकार दिया गया है, लेकिन विवाहित महिला को नहीं। 

उन्होंने आगे कहा कि पीड़िता के पति से जुड़े गैंगरेप में सह-अभियुक्त को बलात्कार कानून का खामियाजा भुगतना पड़ेगा; लेकिन केवल पीड़िता के साथ अपने संबंधों के कारण अपराधी पति को नहीं। उन्होंने कहा कि राज्य के पास विवाह को बचाने का एक वैध हित नहीं हो सकता है जब विवाह ही अत्याचार हो।

इस तर्क पर कि राज्य ने यौन अपराधों के अन्य रूपों को मान्यता दी है और केवल पारिवारिक संरचना की रक्षा के लिए अपवाद दिया है, जस्टिस शकधर ने कहा कि यह घृणित कानून को मान्यता देने के बराबर है कि जिसमें एक विवाहित महिला को केवल एक निजी संपत्ति मान लिया जाता है।

इस तर्क पर कि अपवाद को समाप्त करने से झूठे मामले दर्ज होंगे, जस्टिस शकधर ने कहा कि ऐसी धारणा के समर्थन में कोई आंकड़ा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि झूठे मामलों से निपटने के लिए अदालतें पूरी तरह से सुसज्जित हैं।

टॅग्स :रेपदिल्ली हाईकोर्ट
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