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किसानों को कुचलने के मामले में मंत्री-पुत्र आशीष मिश्रा की जमानत सुप्रीम कोर्ट ने की रद्द, हाजिर होने के लिए मिली एक हफ्ते की मोहलत

By विशाल कुमार | Updated: April 18, 2022 12:00 IST

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में हत्या के आरोपी केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 फरवरी को जमानत दे दी थी। इसके बाद पीड़ितों के परिवारों, नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ भाजपा पर अपने पार्टी के कार्यकर्ता के बचाव का आरोप लगाया था।

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ठळक मुद्देपीठ ने पिछले सप्ताह सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया था कि आरोपी 'भागने के जोखिम में नहीं है'।आशीष मिश्रा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 फरवरी को जमानत दे दी थी।

नई दिल्ली: लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में हत्या के आरोपी केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा की जमानत को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हाईकोर्ट का आदेश अप्रासंगिक टिप्पणियों पर आधारित है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के अप्रासंगिक विचारों  और पीड़ितों को सुनवाई के अधिकार से वंचित करने को ध्यान में रखते हुए, जमानत आदेश को रद्द कर दिया और मिश्रा को एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने को कहा।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर नए सिरे से सुनवाई के लिए उसे हाईकोर्ट के पास वापस भेज दिया।

पीठ ने कहा कि पीड़ितों को जमानत की सुनवाई सहित सभी कार्यवाही में भाग लेने का पूरा अधिकार है। शीर्ष न्यायालय ने जांच के विषय वाले तथ्यात्मक गुणों की व्याख्या करने के लिए हाईकोर्ट की भी आलोचना की।

फैसले के बाद पीड़ितों की ओर से पेश होने वाली वकील दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से इस मामले को किसी अन्य पीठ को भेजने का अनुरोध करन की मांग की लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा अनुरोध करने से इनकार कर दिया और कहा कि यह हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को तय करना है।

इससे पहले मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने पिछले सप्ताह सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

आशीष मिश्रा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 10 फरवरी को जमानत दे दी थी। इसके बाद पीड़ितों के परिवारों, नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने सत्तारूढ़ भाजपा पर अपने पार्टी के कार्यकर्ता के बचाव का आरोप लगाया था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया था कि जहां 'कथित अपराध गंभीर हैं', वहीं आरोपी 'भागने के जोखिम में नहीं है'।  राज्य ने यह भी वादा किया कि गवाहों को सुरक्षा प्रदान की गई थी जिसका याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने खंडन किया था।

मिश्रा की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका लखीमपुर में हुई हिंसा में मारे गए लोगों के परिवार के सदस्यों जगजीत सिंह, पवन कश्यप और सुखविंदर सिंह ने दायर की थी।

गौरतलब है कि पिछले साल तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में हिंसा के दौरान आठ लोग मारे गए थे। यह हिंसा तब हुई थी जब किसान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इलाके के दौरे का विरोध कर रहे थे।

उत्तर प्रदेश पुलिस की प्राथमिकी के अनुसार, एक वाहन जिसमें आशीष मिश्रा बैठे थे, उसने चार किसानों को कुचल दिया था। घटना के बाद गुस्साए किसानों ने वाहन चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या कर दी।

इस दौरान हुई हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी। केंद्र के अब निरस्त किए गए कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे विपक्षी दलों और किसान समूहों में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश था।

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