लाइव न्यूज़ :

अविवाहित माताओं और बलात्कार पीड़िता के बेटे को दस्तावेजों में केवल मां का नाम रखने की अनुमति, केरल हाईकोर्ट का अहम फैसला

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 24, 2022 17:50 IST

न्यायमूर्ति पी वी कुन्हीकृष्णन ने 19 जुलाई को जारी एक आदेश में कहा कि किसी अविवाहित मां का बच्चा भी इस देश का नागरिक है और कोई भी संविधान के तहत प्रदत्त उसके किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता।

Open in App
ठळक मुद्दे निजता, स्वतंत्रता और गरिमा के मौलिक अधिकारों के साथ रह सकते हैं।देश का संवैधानिक न्यायालय उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा करेगा। याचिकाकर्ता के पिता का नाम उसके तीन दस्तावेजों में अलग-अलग था।

कोच्चिः केरल उच्च न्यायालय ने कहा है कि अविवाहित माताओं और बलात्कार पीड़िता के बच्चे इस देश में निजता, स्वतंत्रता और गरिमा के मौलिक अधिकारों के साथ रह सकते हैं और अदालत ने इसके साथ ही एक व्यक्ति को जन्म प्रमाण पत्र, पहचान प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों में केवल अपनी मां का नाम शामिल करने की अनुमति दे दी।

न्यायमूर्ति पी वी कुन्हीकृष्णन ने 19 जुलाई को जारी एक आदेश में कहा कि किसी अविवाहित मां का बच्चा भी इस देश का नागरिक है और कोई भी संविधान के तहत प्रदत्त उसके किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता। आदेश में कहा गया, ‘‘अविवाहित माताओं के बच्चे और बलात्कार पीड़िता के बच्चे भी इस देश में निजता, स्वतंत्रता और गरिमा के मौलिक अधिकारों के साथ रह सकते हैं।

कोई भी उनके जीवन में दखल नहीं दे सकता और अगर ऐसा होता है तो इस देश का संवैधानिक न्यायालय उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा करेगा।’’ याचिकाकर्ता की मां अविवाहित थीं। याचिकाकर्ता के पिता का नाम उसके तीन दस्तावेजों में अलग-अलग था।

अदालत ने जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रार को कार्यालय में याचिकाकर्ता के संबंध में जन्म रजिस्टर से पिता के नाम को हटाने और केवल माता के नाम के साथ एकल अभिभावक के तौर पर प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वह न केवल अविवाहित मां बल्कि इस महान देश भारत की संतान है।

अदालत ने यह भी कहा कि राज्य को उसकी पहचान और निजता का खुलासा किए बिना अन्य नागरिकों के समान उसकी रक्षा करनी चाहिए। आदेश में कहा गया, ‘‘अन्यथा, उसे अकल्पनीय मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ेगा।’’

न्यायमूर्ति कुन्हीकृष्णन ने कहा, ‘‘हम ऐसा समाज चाहते हैं जिसमें कर्ण जैसे पात्र न हों, जो अपने माता-पिता का पता ठिकाना नहीं जानने के लिए तिरस्कृत होने के कारण अपने जीवन को कोसता है। हमें चाहिए असली वीर कर्ण जो महाभारत का असली नायक और योद्धा था।

हमारा संविधान और संवैधानिक न्यायालय उन सभी की रक्षा करेंगे और नए युग के कर्ण किसी भी अन्य नागरिक की तरह गरिमा और गर्व के साथ जी सकते हैं।’’ अदालत ने सामान्य शिक्षा विभाग, उच्च माध्यमिक परीक्षा बोर्ड, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई), आयकर विभाग, पासपोर्ट अधिकारी, भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग को भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के पिता का नाम आधिकारिक रिकॉर्ड और डेटाबेस से हटा दिया जाए। 

टॅग्स :Kerala High Courtcourt
Open in App

संबंधित खबरें

बॉलीवुड चुस्कीज्योति सिंह के साथ नहीं रहना चाहता और मुझे तलाक चाहिए?, भोजपुरी फिल्म अभिनेता और गायक पवन सिंह ने अदालत में कहा?

ज़रा हटके12 साल की उम्र में किताब-कलम नहीं, कलाई पर शादी का धागा बांध बचपन की हंसी को घूंघट की ओट में छिपा दिया?, बाल-विवाह की बेड़ियां तोड़, अनगिनत लड़कियों के लिए उम्मीद की राह?

क्राइम अलर्टईरान युद्ध के बीच 'भ्रामक' पोस्ट, यूएई ने 19 भारतीयों के खिलाफ की बड़ी कार्रवाई?, डिजिटल प्लेटफॉर्म की कड़ी निगरानी

बॉलीवुड चुस्कीकिस्सा कोर्ट कचहरी का रिव्यू: कोर्ट रूम ड्रामा की परिभाषा बदलती एक मर्मस्पर्शी फ़िल्म!

भारत2020 Delhi riots: कोर्ट ने शरजील इमाम को भाई की शादी में शामिल होने के लिए 10 दिन की दी अंतरिम ज़मानत

भारत अधिक खबरें

भारतबारामती विधानसभा उपचुनावः सीएम फडणवीस की बात नहीं मानी?, कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ आकाश मोरे को चुनाव मैदान में उतारा

भारतUP की महिला ने रचा इतिहास! 14 दिनों में साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

भारतLadki Bahin Yojana Row: महाराष्ट्र में 71 लाख महिलाएं अयोग्य घोषित, विपक्ष ने किया दावा, सरकार की जवाबदेही पर उठाए सवाल

भारतयूपी बोर्ड ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक NCERT और अधिकृत पुस्तकें अनिवार्य कीं

भारतपाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ के कोलकाता पर हमले की धमकी वाले बयान पर सोशल मीडिया पर 'धुरंधर' अंदाज़ में आई प्रतिक्रिया