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बाबरी विध्वंस पर फैसला सुनाते ही रिटायर हुए जज सुरेंद्र कुमार यादव, जानें वजह

By स्वाति सिंह | Updated: September 30, 2020 12:53 IST

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 32 आरोपियों पर फैसला लिखने के साथ ही सुरेंद्र कुमार यादव का कार्यकाल समाप्त हो गया है। बुधवार को ही सुरेंद्र कुमार यादव के रिटायरमेंट का दिन है।

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ठळक मुद्देबाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने फैसला सुनाते हुए सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है। 32 आरोपियों पर फैसला लिखने के साथ ही सुरेंद्र कुमार यादव का कार्यकाल समाप्त हो गया है।

लखनऊ: बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत का कहना है कि ये घटना पूर्व नियोजित नहीं थी। सीबीआई कोर्ट के जज सुरेंद्र कुमार यादव ने 28 साल पुराने इस केस में फैसला सुनाया है।

बता दें कि इस मामले में 32 आरोपियों पर फैसला लिखने के साथ ही सुरेंद्र कुमार यादव का कार्यकाल समाप्त हो गया है। बुधवार को ही सुरेंद्र कुमार यादव के रिटायरमेंट का दिन है। उनके पास शाम 5 बजे तक का ही वक्त है। बता दें कि सुरेंद्र यादव का कार्यकाल एक साल पहले ही पूरा हो गया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी विध्वंस केस की सुनवाई पूरी करने और इस पर फैसला सुनाने के मकसद से उन्हें एक साल का विस्तार दे दिया था। उनके रिटायरमेंट की तारीख 30 सितंबर 2019 थी।

गौरतलब है कि सुरेंद्र कुमार यादव का अयोध्या से काफी पुराना रिश्ता रहा है। दरअसल, उनकी पहली तैनाती अयोध्या में ही हुई थी। जबकि जौनपुर उनका जन्म स्थान है। बता दें कि विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश एस के यादव ने 16 सितंबर को इस मामले के सभी 32 आरोपियों को फैसले के दिन अदालत में मौजूद रहने को कहा था। आरोपियों में वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती, उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के अलावा विनय कटियार और साध्वी रितंभरा शामिल हैं। उमा भारती और कल्याण सिंह कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर दो अलग अलग अस्पतालों में भर्ती हैं।

कल्याण सिंह जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब ही मस्जिद गिरायी थी। सिंह पिछले साल सितंबर में इस मामले की सुनवाई में शामिल हुये थे। राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी इस मामले के आरोपियों में से एक हैं। उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई अदालत को मामले का निपटारा 31 अगस्त तक करने के निर्देश दिए थे लेकिन गत 22 अगस्त को यह अवधि एक महीने के लिए और बढ़ा कर 30 सितंबर कर दी गई थी। सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले की रोजाना सुनवाई की थी ।

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