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संसद में जया बच्चन ने उठाया इलाहाबाद विवि का मुद्दा, कहा- शाम छह बजे के बाद परिसर में पुरुष व कर्मचारी घूमते नजर आते हैं

By भाषा | Updated: December 4, 2019 13:10 IST

सपा सदस्य ने आरोप लगाया कि छात्रावास में पेयजल, शौचालय एवं ग्रंथालय आदि की समुचित सुविधा भी नहीं है। इसके अलावा डिस्पेन्सरी में डॉक्टर भी नहीं होते। उन्होंने कहा ‘‘जिन छात्राओं ने इस संबंध में आवाज उठाई उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया।’’

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ठळक मुद्देछात्रावास में महिला सुरक्षा कर्मी तैनात किए जाने और अन्य खामियों पर तत्काल ध्यान दिए जाने की मांग की।विभिन्न दलों के सदस्यों ने उनके इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया।

राज्यसभा में समाजवादी पार्टी की सदस्य जया बच्चन ने बुधवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास में सुरक्षा संबंधी कथित खामी का मुद्दा उठाया और सरकार से इसके शीघ्र समाधान की मांग की।

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए जया ने कहा कि विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास में असुरक्षा की स्थिति को लेकर वहां रहने वाली छात्राएं और अभिभावक चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि छात्रावास में रहने वाली लड़कियों का आरोप है कि शाम छह बजे के बाद भी परिसर में पुरुष और ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी घूमते नजर आते हैं।

इसकी वजह से लड़कियों में असुरक्षा का माहौल है। जया ने कहा कि छात्रावास में आगंतुक कक्ष नहीं है और अभिभावकों के आने पर लड़कियों को उनसे मिलने के लिए छात्रावास के गेट पर जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि लड़कियों ने खुद ही एक कमरे को आगंतुक कक्ष बनाया था लेकिन इस कमरे को कार्यालय में तब्दील कर दिया गया और फिर से लड़कियां अभिभावकों से मिलने के लिए गेट पर जाती हैं।

सपा सदस्य ने आरोप लगाया कि छात्रावास में पेयजल, शौचालय एवं ग्रंथालय आदि की समुचित सुविधा भी नहीं है। इसके अलावा डिस्पेन्सरी में डॉक्टर भी नहीं होते। उन्होंने कहा ‘‘जिन छात्राओं ने इस संबंध में आवाज उठाई उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया।’’

जया ने सरकार से इस छात्रावास में महिला सुरक्षा कर्मी तैनात किए जाने और अन्य खामियों पर तत्काल ध्यान दिए जाने की मांग की। विभिन्न दलों के सदस्यों ने उनके इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया। इसी पार्टी के रेवती रमण सिंह ने भी इलाहाबाद विवि से जुड़ा मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि दो दशक पहले यह संस्थान ‘‘पूर्व का ऑक्सफोर्ड’’ कहलाता था लेकिन बाद में यहां शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती गई। सिंह ने कहा कि पहले इस संस्थान में बाहर के छात्र पढ़ने आते थे लेकिन अब ऐसे छात्रों की संख्या नगण्य है।

उन्होंने कहा कि संस्थान में शिक्षकों के 582 पद तथा कर्मचारियों के 568 पद रिक्त हैं। दस विभागों में केवल एक ही प्रोफेसर है तथा एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट प्रोफेसर नहीं हैं। सिंह ने सरकार से रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती करने की मांग की ताकि संस्थान में शिक्षा के स्तर में सुधार हो सके। 

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